इस्लामी देशोंके भारत विरोधका सामना करनेके लिए हिन्दू राष्ट्र आवश्यक ! – सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति


११ जून, २०२२
      गोवामें विगत १० वर्षाेंसे हो रहे अखिल भारतीय अधिवेशनके कारण देशमें हिन्दू राष्ट्रकी चर्चा आरम्भ हुई । उसके उपरान्त हिन्दू राष्ट्रका लक्ष्य सामने रखकर विभिन्न क्षेत्रोंमें कार्य करना आरम्भ हुआ है । ‘भाजपा’की प्रवक्ता होनेके समय नुपूर शर्माके द्वारा इस्लामके सन्दर्भमें दिए गए वक्तव्यके कारण विश्वके अनेक इस्लामी राष्ट्र एकत्रित होकर भारतका विरोध कर रहे हैं । ‘अलकायदा’ने तो सीधे भारतपर आक्रमण करनेकी धमकी दी है; परन्तु शिवलिंगको फव्वारा बोलकर अथवा हिन्दू गुप्तांगकी (शिवलिंगकी) पूजा क्यों करते हैं ?’, ऐसा हिन्दूद्वेषी सार्वजनिक वक्तव्य देकर हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाएं आहत करनेवालोंका विरोध करता हुआ कोई नहीं दिखाई देता । इससे विश्वमें हिन्दुओंका न्यूनतम एक राष्ट्र होना क्यों आवश्यक है ? ये यह ध्यानमें आता है ।
      इसीलिए ही इस वर्ष १२ से १८ जून २०२२ की अवधिमें ‘श्रीरामनाथ देवस्थान’, फोंडा, गोवामें दशम ‘अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन’ आयोजित किया गया है । यह जानकारी हिन्दू जनजागृति समितिके राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजीने यहां आयोजित पत्रकार परिषदमें दी । इस अवसरपर गोवाके ‘भारतमाताकी जय’ संगठनके गोवा राज्य संघचालक प्रा. सुभाष वेलिंगकर, हिन्दू जनजागृति समितिके प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे और सनातन संस्थाके राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस उपस्थित थे ।
     इस अधिवेशनमें हिन्दू राष्ट्रकी कार्यपद्धति अन्तर्भूत करनेके लिए और हिन्दू राष्ट्रके आदर्श राजकी कार्यप्रणालीके विषयमें दिशादर्शन करने हेतु ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’का आयोजन किया गया है ।
      अहिन्दू पन्थोंके तत्त्व ज्ञानसे संचालित क्षेत्र व तथाकथित राष्ट्रोंसे समस्त मानवता त्रस्त है, जिसकी कालान्तरमें सदैव दुर्गति होती आई है और भविष्य अधरमें सुस्पष्ट दिखाई देता है । भारतवर्षमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना समस्त धराके लिए अत्यधिक शुभ है, अहिन्दू पन्थोंसे संचालित राष्ट्रों व जनसमूहोंको भी अहिन्दू विचारधाराको त्यागकर सनातन धर्ममें पुनः लौटना चाहिए, यही श्रेयस्कर होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
साभार : https://sanatanprabhat.org


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