हमारी संस्कृतिमें जिस भी व्यवसाय या पुरुषद्वारा स्त्रीके नग्न देहका माध्यम बनाकर व्यापार किया जाता था या जीवकोपार्जन किया जाता था , उसे समाज अत्यधिक हेय दृष्टिसे देखता था क्योंकि ऐसा करना पुरुष एवं उस व्यवसायी के लिए लज्जास्पद था, परंतु आज पत्रकार, कलाकार (निर्देशक इत्यादि), चित्रकार, शिल्पकार और न जाने कितने ‘कार’ सभी स्त्रीकी नग्नता के सहारे अपनी जीविकोपार्जन करते हैं !! और परिणाम बलात्कारकी महामारी तीव्र गतिसे चहुं ओर फैल रही है। कुछ मूर्ख स्त्रियां ओछी लोकप्रियता और त्वरित ठाठ -बाटके लिए नग्नताका प्रदर्शन कलाके नामपर कर रही हैं ! आज यदि आप ऑनलाइन आज तक, दैनिक भास्कर, टाइम्स ऑफ इंडिया , अमर उजाला हिंदुस्तान इत्यादि ऐसे किसी भी प्रसिद्ध समाचारके माध्यमको देखेंगे तो उसमें निहित स्त्रियोंके अश्लील और वीभत्स चित्रों और भद्दे समाचारको देखकर आपको निश्चित ही लगेगा कि क्या सचमें ये पत्रकारिता ही कर रहे है या पत्रकारिताके नामपर इन्होंने कोई ‘और’ व्यवसाय भी आरंभ कर रखा है या इनके घरमें मां- बहनें नहीं है, या इन्होंने कभी स्त्रीको देखा नहीं है कि वे उनका इतना विभत्स प्रदर्शन कर रहे हैं – तनुजा ठाकुर
Bilkul Satya kaha aaapne… uparyukt saare newspaper… isi mein leeen hain….