मेरे कुछ मित्रोंने कहा कि आप अपने ज्ञानकी बातोंमें राजनैतिक बातोंका समावेश न करें इससे आपकी बारेमें लोगोंकी धारणा परिवर्तित जाएगी। आप अपने आपको आध्यात्मिकता तक ही सीमित रखें !
एक सरल सा तथ्य जान लें “वैदिक सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ स्तरका अध्यात्मशास्त्र सिखा सकता है अतः यदि धर्म शिक्षण देती हूं तो राजधर्म सीखाना भी परम आवश्यक है, जो धर्मका अविभाज्य अंग है ईश्वरने भी श्रृष्टिके निर्माणके पश्चात समाजको सुव्यवस्थित चलानेके लिए सर्वप्रथम राजधर्मका प्रतिपादन किया ! पिछले एक सहस्र वर्षोंसे हमने राजधर्म सीखना और सीखाना छोड दिया परिणामस्वरूप आज गुंडे और दुर्जन सत्ता संभालने लगे हैं और चारो ओर हाहाकार मच गया है ! और रही बात मेरी छविकी तो समाज मेरे बारेमें क्या कहता है और सोचता है इसके बारेमें मैंने कभी विशेष ध्यान नहीं दिया है परंतु मेरी सर्व कृति ईश्वराभिमुख हो और उनकी कृपा संपादित होती रहे इसका अवश्य ध्यान रखती हूं – तनुजा ठाकुर
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