उत्तराधिकारी घोषित करनेके सम्बन्धमें सन्तों और आजके नेताओंमें भेद !


अध्यात्मप्रसारके मध्य पिछले कुछ वर्षोंसे अनेक आश्रमोंसे सम्पर्क बना है और मैंने पाया है कि जब उस आश्रमके मुखिया पदपर आसीन सन्तको यदि कोई योग्य उत्तराधिकारी नहीं मिलते हैं तो उनके देह त्यागके पश्चात उनकेद्वारा किया जा रहा कार्य निर्विघ्न होता रहे, इस हेतु वे एक न्यासकी स्थापना कर, सर्व कार्य न्यासके योग्य सदस्योंको सौंप देते हैं ! वहीं आजके नेता, चाहे उनका पुत्र या पत्नीमें राज्य करनेकी क्षमता रखता हो या नहीं, वे उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाने हेतु सारे हथकण्डे अपनाते हैं, कुछ तो यदि स्वयं भ्रष्टाचारके दोषी पाए जाते हैं और कारागारमें रहते हैं तो अपनी अशिक्षित पत्नीको अपनी आसन्दीपर (कुर्सीपर) बैठा देते हैं ! ऐसी राजनीतिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य है ! -तनुजा ठाकुर  (१६.३.२०१४ )



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution