संतोंपर निराधार आरोप लगाकर उन्हें कारागृहमें रखनेवाले यह नहीं जानते कि इससे उनके पापका घडा शीघ्र भर रहा है और उसके पश्चात् ईश्वरीय विधान अनुसार उन्हें कठोर दण्ड मिलेगा ही ! दुर्जनोंके विनाश और साधकोंके रक्षण संबंधी अनेक प्रत्यक्ष घटनाओंसे भी दुर्जन सीखते नहीं और डरते नहीं, सचमें इसे ही ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ कहते हैं -तनुजा ठाकुर
aap n sahi likha lakin dand usi ko milta h jisne pap kiya ho