हिंदुओंमें सांघिक भावनाके अभावके परिणाम


जब भी हिन्दू संत, हिंदुत्वनिष्ठ या हिन्दुत्ववादी संस्थाको  षडयंत्रोंमें फंसाया जाता है तो अन्य हिन्दू संत, आध्यात्मिक संस्थाएं , हिंदुत्ववादी संस्थाएं, हिंदुत्ववादी राजनैतिक पक्ष सब अपना पल्ला झाड सब कुछ तटस्थ होकर देखते रहते हैं ! आजकी निधर्मी राज सत्ताका कोप आज नहीं तो कल सभी हिंदुओंको सहन करना ही पडेगा, जी हां, सभी को, यदि आज हम एकजुट होकर उनके ऐसे कुकृत्योंका विरोध नहीं करेंगे तो उन्हें ऐसा पुनः करनेको बल मिलेगा और मिल ही रहा है और तब आपकी क्या स्थिति होगी यह स्वयं सोचें ! पूज्य रामदेव बाबा, स्वामी नित्यानन्द, परम पूज्य शंकराचार्य, पूज्य आसाराममजी बापू जैसे अनेक संतोंके साथ हुए षडयंत्रोंके विरोधमें आज तक यह हिन्दू समाज एकजुट होकर विरोध नहीं कर पाया और यह निधर्मी मीडिया इसी का लाभ उठाकर समाजको दिशाभ्रमित करते हैं । हिंदुओंमें सांघिक भावनाके अभावके परिणामस्वरूप प्रत्येक वर्ष वे किसी न किसी संतको अपने षडयंत्रोंका शिकार बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं, यह सामान्यसा तथ्य आजके हिन्दू समाज, कथावाचक , सन्यासी , संत और हिंदुत्ववादी व्यक्तिको समझमें नहीं आता यह सौ कोटि हिंदुओं वाले इस धर्मनिरपेक्ष देश की सबसे बडी विडम्बना और क्षोभका विषय है -तनुजा ठाकुर



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