
राज्य करनेवाले राज्यकर्ताकी प्रवृत्ति यदि आसुरी हो तो पडोसी शत्रु राष्ट्र सीमाको पार कर बार-बार घुस आता है, स्त्रियोंके बलात् शीलहरणसे वातावरणमें त्राहिमाम् गूंजने लगती है, राजभवन और संसद भवन, मछ्लीके हाटसे भी अधिक दुर्गंधित स्थान बन जाता, जहांसे राज्यकर्ताओंके कुकर्मोंकी दुर्गंध सम्पूर्ण विश्वमें व्याप्त हो जाती है और राष्ट्रमें नैसर्गिक आपदा रूपी दानव चहुं ओर नरसंहार करने लगती है; अतः ऐसे राज्यकर्ताओंकों जैसे पागल कुत्तोंकों पत्थरसे मार-मार कर मारा जाता है, वैसे ही इनका भी संहार करना चाहिए ऐसा शास्त्रवचन है ! – तनुजा ठाकुर (१२.४.२०१२)
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