
अनेक व्यक्ति पूछते हैं कि हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना इतने सारे दुर्जनों, विघटनकारी एवं अधार्मिक तत्त्वोंके होते हुए कैसे हो सकती है ?
हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना संतोंके संकल्पसे होगी ! ध्यान रहे जो सामान्य व्यक्तिकी कल्पनासे परे है उसे जो सिद्ध कर दिखाए उसे ही ब्राह्मतेज युक्त जीव कहते हैं ! और आज भारतको वही ब्राह्मतेज पुनर्जीवन देगा ! अनेक साधनारत ब्राह्मतेजयुक्त जीवोंके मनमें आए विचारको क्षात्रतेज युक्तजीव उन विचारोंको ग्रहण कर उन्हें क्रियान्वित कर हिन्दू राष्ट्रके स्वप्नको साकार करेंगे !! और इस प्रक्रियामें सूक्ष्म स्तरपर प्रभु राम, श्रीकृष्ण जैसे अवतार, देवी-देवता, सप्त चिरंजीव एवं गुप्त सिद्ध योगी सब उसमें सहायता करेंगे और प्रकृति अपने विनाशक रूपमें दुर्जनोंका संहार करेगी ! यह प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और हम एक स्वर्णिम भविष्यके साक्षी हैं एवं उसके संधिकालके द्वारपर खडे हैं; परंतु इस स्वर्णिम भविष्यसे पहले दुर्जनोंके पापके घडे भरेंगे, महाविनाश होगा और उसके पश्चात् नवनिर्माणका कार्य वर्ष २०२३ से आरंभ होगा !!
अतः इस ऐतिहासिक कालके मात्र साक्षी ही नहीं अपितु सहभागी बनें, इस हेतु साधना करें। राष्ट्र रक्षण और धर्मजागृतिके कार्यमें सहभागी होकर यथाशक्ति योगदान देकर धर्मके पक्षमें आ जाएं। ध्यान रहे, निकट भविष्यमें दुर्जनोंके साथ सज्जन भी भारी संख्यामें विनाशकी बलि चढनेवाले हैं ! इतिहास इस बातका साक्षी है कि अधर्म और राष्ट्रद्रोहके मूक समर्थकोंका नाश होता ही आया है, इस तथ्यकी सत्यतासे तो सभी परिचित ही हैं !!-तनुजा ठाकुर
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