इस देशकी जनताको अंधोंमें कनवा राजाके समान राज्यकर्ताओंका चयन कर संतुष्ट होना पडता है, अर्थात भ्रष्टोंमें जो कम भ्रष्ट हों, अपराधियोंमें जिसने कम अपराध किया हो इत्यादि ! ऐसे भ्रष्ट और निधर्मी लोकतंत्रके स्थानपर धर्म अधिष्ठित हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अनिवार्य हो गया है जहां सभी राज्यकर्ता धर्माचरणी एवं प्रजापालक होंगे |
Leave a Reply