यदि ठोस प्रमाण नहीं हैं, तो सम्बन्धित स्थान ‘नमाज’ पढनेके लिए ‘धार्मिक स्थल’ नहीं माना जा सकता ! – सर्वाेच्च न्यायालय
०२ मई, २०२२
‘राजस्थान वक्फ बोर्ड’की याचिकाको निरस्त करते हुए सर्वाेच्च न्यायालयने निर्णय दिया है, ‘‘यदि पुरातन भीत अथवा स्तम्भके स्थानोंपर पूर्वसे धार्मिक कृत्य होनेके प्रमाण न हों और यदि उनका वर्तमानमें भी प्रयोग नहीं किया जाता है तो वह स्थान ‘नमाज’ पढनेके लिए ‘धार्मिक स्थल’ नहीं माना जाएगा ।” इससे पूर्व राजस्थान उच्च न्यायालयने भी ऐसा ही निर्णय दिया था । न्यायालयने कहा है, ‘‘इस सन्दर्भमें याचिकाकर्ता ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके ।” राज्यके भीलवाडाकी भूमि ‘जिंदल सॉ लिमिटेड कम्पनी’को खानके लिए दी गई है । इसके विरुद्ध ‘वक्फ बोर्ड’ने याचिका प्रविष्ट की थी ।
धर्मान्ध जिहादी ‘लैंड जिहाद’के माध्यमसे ‘गजवा-ए-हिन्द’के तमोगुणी साम्राज्यके लिए उद्यत हैं । वहीं अन्य ओर शासन प्रशासन प्रक्रियात्मक क्रीडातक ही उलझा हुआ है । भारतवर्षमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य है, ऐसा विश्वके सभी हिन्दुओं सहित भारतसे आत्मीयता रखनेवालोंको लगता है; तभी जिहादियोंकी विनाशक मानसिकताको पूर्णतः नियन्त्रित किया जा सकेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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