‘मन्दिर शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त नहीं हुए तो अस्त्र उठाएंंगे,’ महन्तोंकी चेतावनी, मुट्ठी भर किसान अपनी मांंग मनवा सकते हैं तो हम भी करेंगे


२२ नवम्बर, २०२१
       देशकी राजधानी देहलीमें एक और आन्दोलनके सङ्केत मिलने लगे हैंं । इस बार सन्त समाजने मठ-मन्दिर मुक्तिके लिए राष्ट्रव्यापी आन्दोलनकी चेतावनी दी है । इसके लिए सन्तोंने दक्षिण देहलीके कालकाजी मन्दिरमें एक महासभा की । उन्होंने शान्ति और शस्त्र दोनों उठानेकी घोषणा की । इस मध्य कई मठों, मन्दिरों, अखाडों, आश्रमोंके सन्त उपस्थित रहे । सभामें किसान आन्दोलनका उल्लेख करते हुए कहा गया कि जब मुट्ठीभर किसान शासनसे अपनी बात मनवा सकते हैं, तो हम क्यों नहीं ?
         देशमें तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और केरलके मन्दिरोंकी स्थिति सर्वाधिक विकट है । सभामें शस्त्रोंकी उस उक्तिका भी उल्लेख किया गया कि यदि देवधन राजकोष में जाएगा, तो कोष कभी नहीं भरेगा । राजेंद्र दासके अनुसार, उन्हें ३० नवम्बरको आ रहे निर्णयकी प्रतीक्षा है, जिसमें देवस्थानम् समितिको लेकर निर्णय किया जाना है । उन्होंने इस प्रकरणमें निर्णय अपने पक्षमें होनेकी आशा व्यक्त की है । राजेंद्र दासके अनुसार, अन्य देशोंमें धर्मस्थलोंके लिए शासन धन देता है; किन्तु भारतमें शासन मन्दिरोंके चढावेपर दृष्टि रखता है ।
        कालानुसार हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए कृतिशीलता व समाजको साधना हेतु प्रेरित करना ही उत्तम उपाय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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