जुलाई १०, २०१८
उत्तर प्रदेशके कैरानाके पश्चात अब मुजफ्फरनगरमें भी पलायनका प्रकरण सामने आया है । यहां एक विशेष समुदायके लोगोंसे तंग आकर दर्जन भर हिन्दू कुटुम्बोंने अपने घरके बाहर, ‘यह मकान बिकाऊ है’, लिखकर पलायनकी बात कही है । पलायनकी बातका संज्ञान होते ही प्रान्तीय प्रशासनने गांवमें पहुंचकर पीडित कुटुम्ब वालोंसे वार्ताकर पलायन करनेके कारणोंका संज्ञान लिया है ।
प्रकरण थाना सिखेडा क्षेत्रके गांव निरानाका है । यहां गत दिवस गांवमें एक बारात आई हुई थी । इसमें कुछ असामाजिक तत्वोंने घुसकर कुछ लोगोंके साथ मारपीटकी थी ! पीडीतके परिवादपर थानेमें अभियोग अंकित हो गया था; लेकिन १० दिवस होनेके पश्चात भी सिखेडा पुलिसने दोषियोंको बन्दी नहीं बनाया ।
वहीं, पीडितोंका आक्षेप है कि गांवकी चौकीका अधिकारी दोषियोंके परिजनोंको अपने साथ मोटर वाहनपर बैठाकर गांवमें घूमता है ! साथ ही असमाजिक तत्व गांवमें बने शमशान घाटमें क्रिकेट खेलते हैं और जानबूझकर घरमें गेंद डालते हैं, फिर दीवार लांघकर घरमें घुसते हैं और मना करनेपर गाली गलौच करते हुए उपद्रव करते हैं !
इन असमाजिक तत्वोंकी इन्ही कृत्योंसे परेशान होकर इन पीडित कुटुम्बोंने अपने घरोंके बाहर ‘यह मकान बिकाऊ’ लिखकर गांवसे पलायनकी विवशता बताई है । पलायनकी सूचना मिलते ही मुजफ्फरनगर प्रशासनके एसपी सिटी पुलिस बलके साथ गांवमें पहुंचे और पीडित कुटुम्बसे भेंटकर असामाजिक तत्वोंपर कडी कार्रवाईका आश्वासन दिया ।
वहीं, पीडित कुटुम्बकी महिलाओंका कहना है कि हम विवश हो गए हैं घर छोडनेके लिए; क्योंकि एक विशिष्ट समुदायके लोग हमे बहुत परेशान करते है और छेडछाड करते हैं । इससे अच्छा है कि हम गांव ही छोड दें !
पुलिस अधिकारी ओमवीर सिंहने बताया कि इन असमाजिक तत्वोंको बन्दी बनानेके लिए निर्देशित कर दिया गया है और साथ ही लोगोको समझाया गया है कि वो गांव न छोडे ! १०-१५ दिवस पूर्व एक बारातमें बच्चोंका आपस में झगडा हो गया था जिसे लेकर एक परिवाद दी गई थी । दोनों पक्षोंद्वारा यह प्रयास किया गया कि आपसी सहमतिसे कोई समझौता हो जाए; लेकिन नहीं हो पाया ।
ओमवीर सिंहने आगे बताया कि पीडित पक्षका सोचना यह था कि पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही है । इसीको लेकर कुछ घरोंपर लिखा हुआ है कि ‘मकान बिकाऊ है’ । हमने दोनों पक्षों व गांव प्रधान सबसे बात की, ऐसी बात नहीं है छोटे-छोटे प्रकरण है, जैसे निकट ही एक शमशान है, जहां बच्चे क्रिकेट खेलते है, जिनकी गेंद सामने घरमें चली जाती है, उससे निश्चित रूपसे असुविधा होती है; लेकिन इसमें कोई भी उपद्रवका प्रयास नहीं किया जाना चाहिए !
इस बारे में पीडित प्रवेश पालका कहना है कि हमारे गांवमें जितने भी हिन्दू लोग हैं, उनके पलायन करनेकी आज परिस्थिति आ चुकी है । हमने २९ को परिवाद दी थी, परन्तु प्रशासनद्वारा आजतक यहांपर कोई कार्रवाई नहीं हुई ! आज हमारे लोगोंकी यह स्थिति हो गई है कि हमारी बेटियोंको विद्यालयतक जानेमें भय लगता है । हमारी बेटियोंके रिश्ते होने यहां बन्द हो गए है ! मन्दिरके ध्वनि विस्तारक यन्त्र तक बन्द करा देते है । हम सम्बन्ध रखना चाहते थे; लेकिन आज हमारी कोई सुनवाई नहीं, गांवका कोई व्यक्ति हमारी बात सुननेको तैयार नहीं है ! १५-२० कुटुम्ब हैं, जिनकी पलायन करनेकी स्थिति आज आ चुकी है ।
स्रोत : आजतक
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