हिंदुओ, अन्याय व अनैतिकताको नष्ट कर, खरा रावण दहन करें !
१. दशहरेके दिन रावणकी प्रतिमा जलानेका अर्थ है, अन्याय और अनैतिकता को नष्ट करना !
दशहरा अर्थात विजयका पर्व ! न्याय और नैतिकताका पर्व ! सत्य एवं शक्तिका पर्व !’ इसी दिन भगवान श्रीरामने राक्षसोंके राजा रावणका वध किया था । इस विजयके प्रतीकके रूपमें ही प्रतिवर्ष दशहरेपर रावणकी प्रतिमा जलाई जाती है । यह त्यौहार हमें यह संदेश देता है कि ‘किसी भी प्रकारके अन्याय और अनैतिकताका नाश अटल है ।’ संसारकी सर्व शक्तियां और सिद्धियां प्राप्त होनेपर भी यदि कोई सामाजिक हितके (प्रतिष्ठाके) विरुद्ध वर्तन करेगा, तो उसका विनाश अटल है। २. हमारी संस्कृतिके प्रत्येक त्यौहारमें जीवनके लिए दिशादर्शक संदेश और कोई लोक-कथा अंतर्भूत होती है, अतः उसे गंभीरतासे समझकर आत्मसात करनेसे अन्योंकी जीवनशैलीका अनुसरण करनेकी आवश्यकता नहीं होगी !
भारतीय संस्कृति, विविध त्यौहारोंसे पिरोई हुई एक रंग-बिरंगी माला है । प्रत्येक त्यौहारमें जीवनको दिशा देनेवाला संदेश और लोक-कथा अंतर्भूत है । हम भारतीय उत्सवप्रिय हैं । इसलिए हम त्यौहार बडी धूमधामसे मनाते हैं; परंतु उसमें विद्यमान संदेश और जीवनका मर्म सिखानेवाली लोक-कथाओंको समझना भूल जाते हैं । हम यदि अपनी संस्कृतिकी गहनताको समझ लें और उसे आत्मसात करें, तो किसीकी जीवन शैलीका अनुसरण करनेकी कोई आवश्यकता ही प्रतीत नहीं होगी ।
३. गरबेके मंडपमें ‘गर्भनिरोधक गोलियोंके’ विज्ञापन लगाकर आयोजक युवा पीढीको कौनसा संदेश देना चाह रहे हैं !
सद्भाव और पवित्रतासे ओतप्रोत गरबा-नृत्यके मंडप आजकल पुष्पमालाओंकी सजावटके स्थानपर गर्भनिरोधक गोलियोंके विज्ञापनोंसे अधिक सजे हैं । इन कार्यक्रमोंके आयोजक हमारी युवा पीढीको कौनसा संदेश देना चाहते हैं ? न कोई सामाजिक बंधन, न गौरव, न किसी प्रकारकी लज्जा और सम्मान ! नवरात्रिके उपरांत गर्भपात करनेवालोंकी संख्या गिनना, तो अब नगरोंसे लेकर छोटी गलियोंतक सामान्य सी बात हो गई है ।
४. कहां महाबलशाही रावणसे दृढ आत्मविश्वासके बलपर अपने सतीत्वकी रक्षा करनेवाली सीता, तो कहां इस त्यौहारके नामपर कंठतक स्वैराचारमें डूबी आजकी पीढी !
उपहास तो देखें ! नवरात्रिके उपरांत आनेवाले दशहरेकी कथा इस प्रकार है कि माता सीताने परम शक्तिशाली रावणसे केवल घासके एक तिनके और चारित्र्यसंपन्नताके बलपर, स्वयंको बचा लिया । अंतमें प्रभु श्रीरामने दुष्ट, दुराचारी रावणका अंत कर, सीताको मुक्त करवाया । अपने स्त्रीत्वकी रक्षा इतने आत्मविश्वाससे करनेवाली नारीमें, कितना तेज और सतीका बल होगा !
५. खरे रावणोंके दहनके साथ ही नौ दिनोंके शक्तिपूजनके उपरांत आनेवाला दशहरा सार्थ होगा ?
जबतक खरे ‘रावण’को पहचानकर उसका दहन नहीं होगा, तबतक ९ दिनोंके शक्तिपूजनके उपरांत सीतामाताकी पवित्रता एवं श्रीरामजीकी विजयप्राप्तिका दिन अर्थात ‘विजयादशमी’ कैसे सार्थ होगी ? (संदर्भ – मासिक गुरुगोविंद दर्शन, अक्टूबर-नवंबर, २०११)
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