अप्रैल १७, २०१९
पश्चिम बंगालमें लोकसभा चुनावोंके दूसरे चरणमें हो रहे मतदानमें रायगंज जनपदमें धर्मके आधारपर मतदाताओंके साथ भेदभाव किया जा रहा है ।
‘टाइम्स नाऊ’के अनुसार, यहांके एक गांवके हिन्दू मतदाताओंने दावा किया है कि उन्हें मतदान करने नहीं जाने दिया गया ! वहीं कुछने कहा कि उनके नामपर कुछ फर्जी मतदाताओंने वोट डाल दिया है । इन लोगोंका कहना है कि जब प्रातःकाल वे मतदानके लिए पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनके नामपर वोट डल चुका है !! कुछ प्रत्यक्ष द्रष्टाओंके माध्यमसे बताया गया है किकुछ मुस्लिम लोगोंने हिन्दू मतदाताओंको वोट डालनेसे रोका !! यही नहीं उनके मतदाता पहचान पत्र भी ले लिए !
लोगोंने अपनी मतदाता पर्ची और उंगलियां भी दिखाईं, जिनपर स्याही नहीं लगी थी । इन लोगोंका दावा है कि उन्हें इसलिए वोट करनेसे रोक दिया गया; क्योंकि वे भाजपाको वोट देना चाहते थे !!
यह गांव मुस्लिम बहुल जनसंख्या वाला है । यद्यपि यहां ६०० हिन्दू भी रहते हैं । इनमेंसे जो लोग प्रातःकाल वोट डालने गए थे, उन्हें चुनाव अधिकारियोंने बताया कि उनका वोट डल चुका है । लोगोंका कहना है कि यहांके मुस्लिम टीएमसीसे जुडे हुए हैं ।
इससे पूर्व, भाजपा महासचिव और रायगंजसे प्रत्याशी देबश्री चौधरीने भी आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ता मतदान केन्द्रोंपर अधिकार करनेका प्रयास कर रहे हैं ।
“बंगाल अब भारतका अंग जैसा नहीं रहा है, यह एक इस्लामिक राज्य जैसा बनता जा रहा है, यह समाचार तो कमसे कम यही दिखा रहा है और टीएमसीका वास्तविक इस्लामिक रूप उजागर कर रहा है । बांग्लादेशी अभिनेताओंको प्रचारके लिए बुलाना, हिन्दुओंको मतदानसे रोकना, बूथ कैप्चरिंग करना ये सभी कृत्य एक अराजक व नियन्त्रणहीन सत्ताकी ओर संकेत कर रहा है । इससे पूर्व यह संतोंकी भूमिसे कश्मीरकी भांति एक स्वतन्त्र इस्लामिक राज्यकी मांग उठे, वहां राष्ट्रपति शासन लगना आवश्यक है और जितने भी अवैध बांग्लादेशी वहां आए है और दिन प्रतिदिन संख्या बढ रही है, उसे नियत्रण करना अति आवश्यक है; अन्यथा अभी तो मतदानसे रोका है; परन्तु कौन जानता है कि कलको वह घोषणा न हो, जो कश्मीरमें हुई थी, जिसका परिणाम आज भी कश्मीरी हिन्दू भोग रहे हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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