नियमके उल्लङ्घनवाला कोई दृश्यपट नहीं, उसके पश्चात भी ‘चैनल’ निलम्बित रहेगा’, ‘यूट्यूब’ने ऐसे कुचला एक राष्ट्रवादीका स्वर 


२५ नवम्बर, २०२१
      भारतमें बहुराष्ट्रीय सामाजिक जालस्थल ‘कम्पनियां’ अपनी स्वेच्छाचारी चलानेपर उतारू हैं । कभी ‘फेसबुक’ राष्ट्रवादी ‘मीडिया पोर्टलों’के विरुद्ध विभिन्न प्रकारके टालमटोलकर कार्यवाही करता है, कभी ‘ट्विटर‘ राष्ट्रवादियोंके खाते बन्द कर देता है, तो कभी ‘यूट्यूब’ राष्ट्र और धर्मकी बात करनेवाली विषय-वस्तु लेखकको रंगमंच छोडनेपर ही विवश कर देता है । इसका एक उदाहरण है, ‘सब लोकतन्त्र’, जिसकी स्थापना रचित कौशिकने की थी । ‘यूट्यूब’ने बारम्बार इस ‘चैनल’को बन्दी करके हटा दिया ।
      यद्यपि, रचित कौशिक अब भी ‘सब लोकतन्त्र’पर सक्रिय हैं और इस जालस्थलके माध्यमसे समसामयिक विषयोंपर विश्वको दृश्यपटके माध्यमसे अपनी बात पहुंचाते रहते हैं; किन्तु, ‘यूट्यूब’पर जो उनके अभिदाता थे, वे अब भी उनके दृश्यपटोंकी प्रतीक्षा करते हैं । ऐसा प्रथम बार या किसी एक विषय-वस्तु लेखकके साथ नहीं हुआ है । देखा जाए तो अमेरिकामें जन्मी ये सामाजिक जालस्थल ‘कम्पनियां’ प्रत्येक देशकी राजनीतिको अपने अनुसारसे नृत्य कराना चाहती है।
      ‘यूट्यूब’ने सब लोकतन्त्र नामक ‘चैनल’को निलम्बित कर दिया, बिना किसी कारण निलम्बित करनेके पश्चात यह बात ‘ईमेल’पर बताई । परिवादके लिए परिवेदना अधिकारीकी मांगपर केन्द्र शासन और उच्चतम नयायालयके आदेशोंको ठेंगा दिखाते हुए कहा, “हमारे यहां कोई परिवेदना अधिकारी नहीं, ऐसा कोई पद भी नहीं है ।”
       सामाजिक जालस्थल चाहे ‘यूट्यूब’ हो या ‘फेसबुक’ या ‘ट्विटर’ इन सबका पहला हित व्यापारिक हित होता है और उसके पश्चात कहीं न कहीं इन सभीका वामपन्थकी ओर झुकाव भी है । अवश्यकता है केन्द्र शासन सामाजिक जालस्थलके लिए एक स्पष्ट नीति बनाकर प्रभावी रूपसे क्रियान्वित करे तथा विदेशी ‘मीडिया’को देश तथा जनताके प्रति उत्तरदायी भी बनाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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