सितम्बर २६, २०१८
दस दिवसोंतक विधि-विधानसे पूजा करनेके पश्चात रविवारको यहांके कृत्रिम तालाबों और साबरमती नदीमें गणेश विसर्जन किया गया । विसर्जनके पश्चात जिस प्रकार भगवान गणेशकी मूर्तियोंकी दुर्दशा दिखाई दी, इससे यही लगता है कि मूर्तियां स्थापित कर घरमें विसर्जित की गईं होती, तो यह स्थिति नहीं होती । कई स्थानोंपर गणेशकी प्रतिमाओंको जेसीबी और क्रेनसे तोडा गया ! सोमवारको डम्परोंने नगरके १८४ फेरे लगा कर ५२७ टन प्रतिमाओंको कचरेके मैदानमें डाला !
एक जेसीबी चालकने बताया कि हमारी भावनाएं भी आहत होती हैं, लोग घरमें विसर्जन नहीं करते हैं । इससे हमारा कार्य बढ जाता है । नगरसे कचरा हटानेका कार्य पूर्ण रूपसे बन्द हो जाता है । लोगोंको समझना होगा । प्रतिमाओंको इस प्रकार डम्परमें भरकर मैदानमें डालना हमें भी अच्छा नहीं लगता है, परन्तु क्या करें ? यह तो चाकरी है ।
अहमदाबादकी महापौर बीजल पटेलने कहा कि मुझे नहीं ज्ञात किसके निर्देशपर ऐसा हुआ है । हां, मैं स्वीकार करती हूं कि ऐसा नहीं होना चाहिए । प्रकरण श्रद्धाका है; इसलिए धार्मिक भावनाओंका आहत होना स्वाभाविक है । हम जांच कर उचित कार्यवाही करेंगे ।
रायखड निवासी चेतन प्रजापतिने बताया कि रविवार रात १०:३० बजे के लगभग हम विसर्जनके लिए साबरमती नदी पहुंचे । जहां हमें बताया गया कि नदीमें पीओपीकी प्रतिमाओंके विसर्जनपर प्रतिबन्ध है । हमने प्रतिमाको किनारेपर रख दिया । हमने देखा बडी-बडी ‘क्रेन’केद्वारा प्रतिमाओंको कुण्डमें डुबो कर तुरन्त ही बाहर निकाल लिया जा रहा है और किनारेपर रखा जा रहा है । जब लोग भारी संख्यामें प्रतिमाओंको लेकर आए तो फिर उन्हें सीधे ही किनारेपर रखा गया । रात ११:३० बजे हम घर लौटे आए । देर रात्रि एक मित्रने चलभाषपर बताया कि जो प्रतिमाएं नदी किनारे रखी जा रही हैं, उन्हें जेसीबी और बुलडोजरसे तोडा जा रहा है !
“पुण्यात्मा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलकने गणपति उत्सव अन्तर्गत पण्डालोंकी स्थापना आरम्भ की थी, ताकि हिन्दू एकत्र हो और द्रोहियोंके विरूद्ध एकजुट हो, परन्तु धर्मशिक्षण, बुद्धि, विवेक, प्रतिमाकी स्थापना, प्रकार व विसर्जनका ज्ञान न होनेके कारण आजकल प्रतिस्पर्धाके कारण भिन्न-भिन्न पण्डाल बना, शास्त्रविरुद्ध प्रतिमा रख, हिन्दू अनजानेमें ही पापका भागी हो रहा है । प्रतिमा मिट्टीकी होती है, यह सर्वविदित है, परन्तु आधुनिकतावादके दंशसे पीडित हिन्दुओंने धर्मके साथ-साथ बुद्धिका भी ह्रास कर दिया है !!” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : दैनिक जागरण
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