‘बुलंदशहर हिंसा’पर बोले नसीरुद्दीन, ‘गायको प्राथमिकता दी जाती है, मुझे अपने बच्चोंके लिए भय लगता है’


दिसम्बर २०, २०१८

बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाहने एक साक्षात्कारमें देशके वातावरण और बढती हिंसाको लेकर चिंता प्रकट की है । ये वीडियो साझात्कार ‘कारवां ए मोहब्बत’ नामके यू-ट्यूब चैनलपर साझा किया गया है । जहां नसीरुद्दीन शाहने देशमें हो रही ‘मॉब लिचिंग’ जैसी घटनाओंपर खुलकर अपनी बात रखी हैं । विशेष बात यह है कि नसीरुद्दीन शाहने इस साक्षात्कारमें कहा,  ‘हमने बुलन्दशहर हिंसामें देखा कि गायकी मृत्युको अधिक महत्वपूर्ण समझा जाता है, न कि पुलिस अधिकारीकी मृत्युको, मुझे अपने बच्चोंके लिए भय लगता है कि यदि कही मेरे बच्चोंको भीडने घेर लिया और उनसे पूछा जाए कि तुम हिन्दू हो या मुसलमान ? मेरे बच्चोंके पास इसका कोई उत्तर नहीं होगा । पूरे समाजमें विष फैल चुका है ।’

नसीरुद्दीन शाहने इसमें यह भी कहा कि इस जिन्नको बोतलमें बंद करना कठिन होगा । लोगोंको खुली छूट मिल गई है, विधानको अपने हाथमें लेने की,  परन्तु मुझे इन सभी बातोंसे भय नहीं लगता, वरन् क्रोध आता है । मुझे लगता है कि प्रत्येक मानवको इन बातोंसे भय नहीं लगना चाहिए, बल्कि क्रोध आना चाहिए और ये हमारा घर है कौन निकाल सकता है हमे यहांसे ?

नसीरुद्दीन शाहने अपने बच्चोंको लेकर भी चिंता प्रकट की कि मुझे अपने बच्चोंके लिए भय लगता है कि यदि कही मेरे बच्चोंको भीडने घेर लिया और उनसे पूछा जाए कि तुम हिन्दू हो या मुसलमान ? मेरे बच्चोंके पास इसका कोई उत्तर नहीं होगा; क्योंकि हमने अपने बच्चोंको धार्मिक शिक्षा नहीं दी है, क्योंकि अच्छाई और बुराईका धर्मसे कोई लेना-देना नहीं है ।

 

“किसी भी बुद्धिजीवीको यह क्यों समझ नहीं आता कि मॉब लींचिंगका कारण गौहत्या है, क्योंकि हिन्दू गायको माता मानता है और धर्मान्ध काटते हैं तो सबसे अच्छा समाधान क्या है ? लींचिंग रोकने हेतु प्रत्येक गलीमें पुलिसकर्मी तैनात करना अथवा गौहत्यापर प्रतिबन्ध लगाना ? और नसरुद्दीनजीको बताना चाहेंगें इस्लाममें अच्छे-बुरेका अन्तर समझाता हो या नहीं, परन्तु सनातन धर्ममें पेड-पौधे, पशु-पक्षी आदि सभी पूजनीय हैं, अतः हम अच्छाई- बुराईके साथ मानव बनना भी सिखाते हैं तो वे और उनके बच्चे सनातन धर्मका पालन करें, क्योंकि धर्म आवश्यक है, धर्म बिना अच्छाई जैसे नींव बिना खडा भवन !”- सम्पादक, वैदिक उपसना पीठ

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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