महाराष्‍ट्रके दुर्गोंपर अनधिकृत ‘मजार’, ‘दरगाह’, ‘कब्र’ आदि बांधपर होनेवाले अतिक्रमण तत्‍काल हटाएं !


१५ जनवरी, २०२२
         समूचे महाराष्‍ट्रके आराध्‍य देवता छत्रपति शिवाजी महाराजने मां भवानी और गुरुके आशीर्वाद, शौर्य, पराक्रम, गुरिल्ला युद्धनीति आदि स्‍वकर्तृत्‍वसे तथा महाराजपर अटूट निष्‍ठा रखनेवाले मावळोंके त्‍यागसे ‘हिन्‍दवी स्‍वराज्‍य’की स्‍थापना की । इसी हिन्‍दवी स्‍वराज्‍यमें महाराजके ३०० से अधिक ऐतिहासिक दुर्ग हैं । आज इनकी दुर्दशा तो हो ही रही है, इससे भी गम्भीर यह है कि दुर्गका ‘इस्‍लामीकरण’ करनेका षड्‍यन्त्र भी रचा जा रहा है । बाजीप्रभु देशपाण्डे के अतुलनीय पराक्रमके साक्षी कोल्‍हापुर जनपदके विशालगढपर अनधिकृत निर्माण-कार्य हुए हैं । उसके विरोधमें हिन्‍दू जनजागृति समितिने दुर्गप्रेमी एवं शिवप्रेमी संगठनोंके साथ समूचे राज्‍यमें आन्दोलन भी छेडे; परन्तु वे अतिक्रमण अभीतक हटाए नहीं गए हैं ।
         शिवाजी महाराजके आरमारके मुख्‍य केन्द्र कोलाबा दुर्गपर भी अनधिकृत ‘कब्र’ बांधी गई है । सातारा जनपदके प्रतापगडमें अफजलखानकी ‘कब्र’का अनधिकृत निर्माण-कार्य गिरानेका मुम्बई उच्‍च न्‍यायालयका आदेश होते हुए भी, महाराष्‍ट्र शासनने अनेक वर्ष उसपर कुछ भी कार्यवाही नहीं की । हिन्‍दू जनजागृति समितिने बताया है कि यदि इसपर शासन कुछ नहीं करता है तो वह इस प्रकरणमें समूचे राष्ट्रमें तीव्र आन्दोलन छेडेगी । छत्रपति शिवाजी महाराजके वास्‍तुपर हो रहे अतिक्रमण कदापि सहन नहीं किए जाएंगे, यह गम्भीर हस्तक्षेप पुरातत्त्व विभाग एवं शासन-प्रशासन ले ।
     अनेक दुर्गोंपर धर्मान्धोंने अनधिकृत निर्माण-कार्य, ‘मजार’, प्रार्थनास्‍थल खडेकर दुर्गका ‘इस्‍लामीकरण’ करनेका षड्‍यन्त्र ही रचा है । इतने अतिक्रमण होनेतक पुरातत्त्व विभागके कर्मचारी क्‍या कर रहे थे ? शासन तथा भारतीय पुरातत्त्व विभागका यह दायित्‍व है कि वे इस प्रकरणकी गहन जांच प्रारम्भ करें तथा सभी अनधिकृत निर्माण-कार्य तत्‍काल गिराए जाएं और दुर्गोंका संवर्धन किया जाए ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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