गोवामें धर्मान्तरण प्रतिबन्धक विधान बनानेके लिए तत्काल पग उठानेकी दशम हिन्दू राष्ट्र अधिवेशनमें मांग


१५ जून, २०२२
       आज देशमें प्रतिवर्ष हिन्दुओंका लाखोंकी संख्यामें धर्मान्तरणकर उन्हें ईसाई अथवा मुसलमान बनाया जा रहा है । अनेक राज्योंमें धर्मान्तरण विरोधी विधान है, तब भी उजागर रूपसे बडी मात्रामें हिन्दुओंका धर्मान्तरणकर भारतको तोडनेका षड्यन्त्र चल रहा है । धर्मान्तरणकी समस्या देशव्यापी होनेके कारण संविधानके अनुच्छेद २५ में सुधारकर उसमेंसे धर्मका प्रचार करना यह शब्द हटा देना चाहिए । इसके साथ ही गोवा शासनको विधानसभामें इससे सम्बन्धित प्रस्ताव पारितकर केन्द्र शासनको भेजना चाहिए । तब ही अवैध धर्मान्तरणपर सम्पूर्ण प्रतिबन्ध लगेगा । स्वयंके धर्मका पालन करनेमें किसी प्रकारकी रोक लगानेकी आवश्यकता नहीं है; परन्तु अन्योंको फंसाकर, बलपूर्वक अथवा उनकी असहायताका अनुचित लाभ उठाकर किए जानेवाले धर्मान्तरणपर प्रतिबन्ध लगानेकी आवश्यकता है, ऐसी मांग ‘सी.बी.आई.’के भूतपूर्व अधिकारी श्री. एम. नागेश्वर रावने पत्रकार परिषदमें की ।
       वह दशम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशनके तृतीय दिन फोंडा, गोवा स्थित श्रीरामनाथ देवस्थानके विद्याधिराज सभागृहमें आयोजित पत्रकार परिषदमें बोल रहे थे । इस अवसरपर व्यासपीठपर हिन्दू जनजागृति समितिके राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे, ईसाई पन्थ छोडकर हिन्दू बनी तेलंगानाकी श्रीमती एस्थर धनराज, छत्तीसगढमें लाखाें हिन्दुओंकी घर’वापसी’ करनेवाले ‘भाजपा’के प्रदेशमन्त्री श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव और नेपालके विश्व हिन्दू महासंघके जनपद अध्यक्ष श्री. शंकर खरेल उपस्थित थे ।
      भारतमें यदि सर्वधर्मसमभाव अर्थात सर्वधर्म समान हैं, तो धर्मपरिवर्तन करने हेतु भारतमें अनुमति क्यों ? स्वतन्त्रताके उपरान्त पूर्वोत्तर राज्योंमें भारी संख्यामें धर्मपरिवर्तन हुआ । इसके लिए शासनसे अनुमति कैसे मिल गई ? – सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे 
 
 
साभार : https://www.hindujagruti.org 


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