भारत हिन्दुओंका देश है, विश्वका कोई भी हिन्दू यहां कभी भी लौट सकता है, मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वा सरमाका वक्तव्य
१२ नवम्बर, २०२१
अपनी हिन्दूवादी छविसे मुखर, असमके मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वा सरमासे ‘टाइम्स नाउ’के शिखर सम्मेलनमें, पत्रकार पद्मजा जोशीने जब प्रश्न किया कि क्या बांग्लादेशी हिन्दुओंको वे भारतमें बसानेके पक्षमें हैं ? तब मुख्यमन्त्रीने कहा कि भारत हिन्दुओंसे सम्बन्ध रखता है । भारत शब्द संविधानके साथ १९४७ से अस्तित्वमें आया । गत ७००० वर्षोंसे हम हिन्दू कहलाते हैं । प्रत्येक हिन्दूको, जिसे किसी देशमें निवास करनेमें कष्टमें हो, वह अपनी मातृभूमि भारतमें लौटकर आ सकता है ।
उन्होंने कहा कि जिन हिन्दुओंने ‘सीएए’ व ‘एनआरसी’का विरोध किया था, उन्हें भी अफगानिस्तानकी स्थिति देखकर इसका महत्व ज्ञात हो चुका होगा ।
असमके ‘मदरसों’पर अपना मत व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘मदरसों’में शिक्षा देकर ‘मुल्ले’ बनाना चाहते हैं । हम उनके बच्चोंको शिक्षितकर चिकित्सक बनाना चाहते हैं । यह मुसलमानोंको सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने बच्चोंको चिकित्सक बनाना चाहते हैं या ‘मुल्ला’ ।
उल्लेखनीय है कि हिमंता बिस्वा सरमाने असममें शासकीय धनसे चलित ‘मदरसों’पर प्रतिबन्ध लगा दिया है । वे कहते हैं कि मुसलमानोंको जब वे विकासके पथपर अग्रसर करनेका प्रयास करते हैं, तो हिन्दू क्रोधित होते हैं; परन्तु उनकेद्वारा ‘मदरसे’ बन्द करवाना, चुनावी दृष्टिसे कष्टकर होता है ।
असमके मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वा सरमाने गत दिनों शासकीय अनुदानसे चलित लगभग ४५० ‘मदरसे’ तत्काल प्रभावसे बन्द करवा दिए । उनका कहना था कि शासकीय व्ययसे किसी धर्मविशेषकी शिक्षा देना संविधानविरोधी कार्य है । इस क्रममें उन्हें कुछ संस्कृतशालाएं भी बन्द करवानी पडीं ।
‘मदरसे’ बन्द करवाना एक साहसिक कार्य था । हिमंत बिस्वा सरमाके विचार प्रशंसनीय हैं और योगी आदित्यनाथके उपरान्त इनके भी कार्योंका अनुसरण अन्य शासकोंद्वारा किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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