‘आतङ्कवादी हैं ‘विहिप-आरएसएस’वाले, हमें मिले सार्वजनिक स्थलमें ‘नमाज’की अनुमति’, भडके ‘मुस्लिम पर्नसल लॉ बोर्ड’ने कहा, “निर्णय स्वीकार नहीं”
१४ दिसम्बर, २०२१
गुरुग्राममें सडकोंपर ‘नमाज’का विरोध करनेवाले हिन्दू संगठनोंके कार्यकर्ताओंको ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ने (AIMPLB ने) आतङ्कवादी कहा है । समितिके महासचिव ‘मौलाना’ खालिद सैफुल्लाह रहमानीने सडकोंपर ‘नमाज’ रोकनेका आदेश देनेवाले हरियाणा शासनके निर्णयको अनुचित बताया है । ‘मौलाना’ खालिद सैफुल्लाह रहमानीके अनुसार, यह निर्णय स्वीकार नहीं है । यह वक्तव्य समितिने १२ दिसम्बरको (रविवारको) प्रस्तुत ‘प्रेस’ विज्ञप्तिमें दिया है ।
‘प्रेस’ विज्ञप्तिमें ‘नमाजी’ मुसलमानोंको वेदना सहनेवाला लिखा गया है । बताया गया है कि सार्वजनिक स्थलमें ‘नमाज’ पढनेवाला ‘नमाजी’, सूर्यका ताप (धूप) और वर्षा सहता है । ऐसेमें शासनका सार्वजनिक स्थलमें ‘नमाज’ न पढने देनेका निर्णय मुसलमानोंपर अत्याचार है ।
पत्रमें आगे खट्टर शासनके निर्णयकी निन्दा करते हुए, मुसलमानोंकी ‘नमाज’ पढनेकी समस्याको शासनद्वारा दूर करनेको कहा गया है । साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) और बजरंग दलके कार्यकर्ताओंको आतङ्कवादी शब्दसे सम्बोधित किया गया है । उनके लिए संवैधानिक रूपसे दण्डकी मांगकी गई है ।
उपर्युक्त प्रकरणसे समझा जा सकता है कि ‘AIMPLB’ के महासचिव ‘मौलाना’ने किस प्रकार मुसलमान समाजकी स्थितिको दयनीय दर्शाया है; यद्यपि वे यह बताना विस्मरण कर गए कि जहां मुसलमान जनसंख्यामें वृद्धि हुई है; वहां हिन्दुओंकी क्या दुर्दशा है ? इसका तुलनात्मक विश्लेषण गुरुग्रामके प्रकरणसे किया जाए, तो अभी वहां कुछ हुआ ही कहां है ? जितना ‘मौलाना’ स्वयंको और मुसलमान समाजको पीडित एवं व्यथित दिखा रहे हैं, यह एक केवल एक षड्यन्त्र है; अतः हिन्दुओंको इनके षड्यन्त्रमें नहीं उलझना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply