उच्चतम न्यायालयकी ओरसे सेवानिवृत्त न्यायाधीशोंके नेतृत्वमें उच्चस्तरीय जांच समितिकी हुई स्थापना
११ जनवरी, २०२२
पंजाबमें प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीके भ्रमणके समय, सुरक्षा व्यवस्थामें हुई अक्षम्य चूकका प्रकरण प्रविष्ट किया गया है । इस प्रकरणमें केन्द्र शासन एवं पंजाब शासनको जांच स्थगित करनेका आदेश दिया गया है । उच्चतम न्यायालयने सेवानिवृत्त न्यायाधीशोंकी अध्यक्षताके अन्तर्गत उच्चस्तरीय जांच समिति स्थापित करनेका निर्णय लिया है । पंजाब शासनके अधिवक्ता ‘डीएस’ पटवालियाने इस प्रकरणकी सुनवाईके समय कहा, “उच्चतम न्यायालयकी इच्छा हो, तो इस प्रकरणमें स्वतन्त्र जांच समिति स्थापित करनी चाहिए । इस समितिको हम सहयोग करेंगे; किन्तु हमारे शासन और हमारे अधिकारियोंपर अभीसे किसी प्रकारका आरोप न लगाया जाए; क्योंकि केन्द्र शासनकी समितिकी ओरसे हमें न्याय नहीं प्राप्त होगा और केन्द्र शासनद्वारा निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी । एक स्वतन्त्र समिति स्थापित करनी चाहिए और हमें निष्पक्ष सुनवाईका अवसर मिलना चाहिए ।”
जांच कोई भी करे, षड्यन्त्रका पता लगना ही चाहिए । वस्तुतः नरेंद्र मोदीको हिन्दू और भारत हितैषी माना जाता है; अतः उनसे भारत विरोधी शक्तियां कुपित हैं और वे किसी भी सीमातक निकृष्टतम कृत्य कर सकती हैं । उनका पता लगना और उन्हें दण्डित करना आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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