ईश्वरं यत करोति शोभनं करोति !


हमारे जीवनमें अनेक ऐसे प्रसंग होते हैं, जो जब घटित होते हैं तो वह क्यों हो रहे हैं ?, यह समझमें नहीं आता है; किन्तु उसका कार्यकारण भाव कुछ काल उपरान्त समझमें आता है और तब ईश्वरके प्रति कृतज्ञताका भाव जागृत होता है । शीघ्र ही हम इस लेखमालाको आरम्भ करेंगे ।



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