उत्तरप्रदेश: बंदी गुप्तचरने स्वीकार किया, ‘पाकिस्तान गुप्तचर विभागके लिए कार्य करनेपर मिलते थे डॉलर’


उत्तरप्रदेश एटीएसद्वारा पिथौरागढसे बंदी बनाए गए रमेश सिंहने पाकिस्तानी गचप्तचर विभाग आईएसआईके दलालोंको प्रदेश स्थित विभिन्न सैन्य स्थानोंकी सभी गोपनीय सूचनाएं दी थीं। आरम्भिक पूछताछमें रमेशने अपराध स्वीकार करते हुए राष्ट्र विरोधी कृत्योंके बारे में उत्तरप्रदेश एटीएससे कई बातें बताई हैं। उसके पाससे मिले उस पाकिस्तानी चलभाषसे भी काफी ब्यौरा मिला है जो उसे आईएसआईद्वारा दिया गया था। पिछले दिनों पिथौरागढमें कैद किये रमेशको गुरुवारको लखनऊमें उत्तरप्रदेश एटीएसके मुख्यालय लाया गया।

यह जानकारी गुरुवारको प्रदेशके एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमारने दी। इस अवसरपर आईजी उत्तरप्रदेश एटीएस असीम अरुण और एसएसपी एटीएस योगेन्द्र कुमार भी थे। आंनद कुमारके अनुसार चूंकि रमेश सिंहसे भारतीय सेनाके खुफिया तंत्रसे जुडे अधिकारी और अन्य भारतीय खुफिया दल भी पूछताछ करेंगी। रमेशको २२ मईको सैन्य संस्थाकी जम्मू-कश्मीर इकाई, उत्तराखण्ड पुलिस और यूपी एटीएसकी कार्रवाईमें पिथौरागढसे बंदी बनाया गया।

पाक स्थित भारतीय उच्चायोगमें घरेलू नौकर था रमेश
आनंद कुमारने बताया कि पिछले दिनों फैजाबादमें पकडे गए आफताबसे मिली सूचनाओंको उत्तरप्रदेश एटीएसने विकसित किया, उसी मध्य यह तथ्य सामने आया कि उत्तराखण्डमें कोई एक ऐसा है जो पडोसी देशकी गुप्तचर विभागके लिए कार्य कर रहा है। इसी जांचमें पिथौरागढ उत्तराखण्ड निवासी रमेश सिंहको बंदी बनाया गया। रमेशका एक भाई भारतीय सेनामें कार्यरत है, उसी की सहायतासे रमेश २०१५ में भारतीय उच्चायोगमें एक भारतीय राजनयिकके घर घरेलू नौकरका रूप ले नौकरी करने लगा।

पाकिस्तानके इस्लामाबाद  स्थित भारतीय उच्चायोगमें वह इस भारतीय राजनयिकके साथ दो साल रहा, वहीं उसके पाक गुप्तचरविभागके सूत्रोंके साथ संबंध बने। उसने वहां रहते हुए सभी सूचनाएं उन्हें दी, जिसके लिए उसे डालरमें धन मिलता था। जब यह छुट्टीमें भारत आता था तो डालर साथ लाता और दिल्लीमें रुपयेमें परिवर्तित कर इस धनको वह अपने गांव ले जाता था। सितंबर वर्ष २०१७ में रमेश वापस भारत आया।

आनंद कुमारने बताया कि रमेश सिंहके ऊपर बैंक व अन्य स्थानीय लोगोंका लाखों रुपयेका ऋण था। रमेशने स्वीकार किया कि उसने भारतसे जुडी महत्वपूर्ण सूचनाएं आईएसआईको देने से पैसे भी मिले जिससे उसने नौ लाख रुपयेका सारा ऋण भी चुकाया।

रमेशने बताया कि पाक स्थित भारतीय उच्चायोगके जिस अधिकारीके यहां वह काम कर रहा था, वह लोग जब घरसे बाहर जाते थे उसी मध्य वह आईएसआईके गुप्तचरोंको डायरी, लैपटाप, फाइलें व अन्य सूचनाएं आदि देता था। कई बार आईएसआईके यह गुप्तचर उससे मिले, दस्तावजे दो-चार घंटेके लिए बाहर ले जाते थे और फिर वापस भी कर देते थे। एक बारमें उसे १३०० डालर मिलनेकी जानकारी तो उसने खुद स्वीकार की है।



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