नवम्बर १, २०१८
ओडिशाके पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मन्दिरके एक पुजारीने उच्चतम न्यायालयके मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोईको एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करनेकी अनुमति मांगी है।
उन्होंने यह पत्र न्यायालयद्वारा चार माह पूर्व दिए गए उस सुझावके परिप्रेक्ष्यमें लिखा है, जिसमें न्यायालयने सेवकोंके वंशानुगत अधिकारोंको समाप्त करनेका सुझाव दिया था और आदेश दिया था कि किसी भी भक्तको चढावेके लिए पुजारियोंद्वारा विवश नहीं किया जाना चाहिए ।
मंदिरके पुजारी नरसिंह पुजापांडाका कहना है कि उनकी आयका एकमात्र स्रोत भक्तोंके उपहार और मंदिरमें किया गया दान था । उन्होंने बुधवार, ३१ अक्तूबरको अपनी याचिकामें लिखा है, “हम उनसे (मुख्य न्यायाधीश) विनती करते हैं कि इसे न रोकें, क्योंकि एक सहस्त्र वर्षोंसे अधिक समयसे ऐसा ही होता आ रहा है । न्यायालय और सरकार हमारी आयका एकमात्र स्रोत रोकनेका प्रयास कर रही है । हम आयके बिना कैसे जीवित रहेंगे ?”
उनका कहना है, “अब सर्वोच्च न्यायालयने मंदिरके सेवकोंको भक्तोंसे दान न लेनेको कहा है, यह तो जीवित रहनेके लिए लगभग असम्भव है । मैंने ओडिशा सरकारसे भी इच्छामृत्युकी मांग की थी, लेकिन उन्होंने इससे अस्वीकृत कर दिया । अब भूखसे मृत्युकी प्रतीक्षा करनेसे अच्छा है कि एक बारमें मर जाएं !”
“देवालय प्रशासन व प्रबन्धन समितिने अबतक पुजारियोंको मासिक आय देनेकी व्यवस्था क्यों नहीं की ? क्या हमारी यही अव्यवस्था और उदासीनता सरकारोंको मन्दिरकी ओर दृष्टि डालनेका साहस नहीं देती ?” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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