जम्मू-कश्मीरमें चुनाव क्षेत्रोंकी पुनर्रचनाके विषयपर विधान करनेके कारण भारतने ‘इस्लामिक सहकार्य संगठन’को फटकार लगाई


१७ मई, २०२२
       ‘इस्लामिक सहकार्य संगठन’को (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) किसी भी एक देशके (पाकिस्तान) निर्देशपर स्वयंकी धार्मिक नीति फैलाना रोकना चाहिए । जम्मू-कश्मीर भारतका अविभाज्य अंग है, ऐसे शब्दोंमें भारतने इस संगठनको फटकार लगाई है । इस संगठनने जम्मू-कश्मीरके विधानसभा और लोकसभा चुनाव क्षेत्रोंकी पुनर्रचनाके विषयमें ‘ट्वीट’कर ‘पुनर्रचनाकी प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषदके प्रस्तावोंका और चौथे जेनेवा ‘समझौते’ सहित अन्तर्राष्ट्रीय ‘कानून’का सीधे उल्लङ्घन है’, ऐसी टिप्पणी की थी । इसपर भारतीय विदेश मन्त्रालयके प्रवक्ता अरिंदम बागचीने विरोध प्रकट करते हुए उपर्युक्त शब्दोंमें फटकार लगाई । केन्द्रीय आयोगने मई माहके आरम्भमें ही पुनर्रचनाके विषयमें अन्तिम ‘रिपोर्ट’ प्रस्तुत की थी ।
        इस संगठनने अप्रैल माहमें ही इस्लामाबादमें इस्लामी देशोंके विदेश मन्त्रियोंकी बैठकमें ‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’के अध्यक्षको बुलाया था । भारतने इसपर तीव्र विरोध भी प्रकट किया था । इससे पूर्व इस संगठनने जम्मू और कश्मीरमें मानवाधिकारोंका उल्लङ्घन होनेका आरोप भी लगाया था । इस सम्बन्धमें संगठनकी बैठकमें प्रस्ताव भी पारित किया गया । ‘कश्मीरका हल निकाले बिना शाश्वत शान्ति स्थापित नहीं होगी’, ऐसा संगठनने कहा था । ‘यह प्रस्ताव निराधार है’ ऐसा कहते हुए भारतके विदेश मन्त्रालयने सभी आरोपोंको नकार दिया है ।
      ‘पाकिस्तान’का भूत और वर्तमान अस्तित्व ही घोर मिथ्यात्व, घोर अमानवीय कृत्यों व प्रपञ्चोंसे आवेशित है; ऐसे विधर्मी क्षेत्रकी (पाकिस्तान) सर्व मांगें निरर्थक हैं । भारतवर्षमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही विश्वशान्ति स्थापित होगी; इस सत्यका बोध अधिकांश राष्ट्रोंको है । पाकिस्तानके अस्तित्व उसकी विचारधाराको नष्ट करना अपरिहार्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
साभार : https://sanatanprabhat.org 


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