अक्तूबर २३, २०१८
जम्मू-कश्मीर सरकारने उस विवादित आदेशको वापस ले लिया है, जिसमें शिक्षा विभागसे राज्यके विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानोंमें ‘भगवद् गीता’ और ‘कोशुर रामायण’का उर्दू संस्करण उपलब्ध करानेको कहा गया था । इस सम्बन्धमें एक अधिकारीने मंगलवार, २३ अक्तूबरको कहा, “मुख्य सचिवके आदेशके अनुसार कुछ धार्मिक पुस्तकोंको सम्मिलित किए जानेके सम्बन्धमें आदेशको वापस ले लिया गया है !”
राज्य सरकारने सोमवार, २२ अक्तूबरको आदेश जारी कर जम्मू-कश्मीर मण्डलके विद्यालय शिक्षा निदेशकको ये धार्मिक पुस्तकें क्रय करनेका निर्देश दिया था । इस आदेशका विभिन्न समुदायोंने विरोध किया था ।
यह कवि सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ने लिखी थी । उनके पुत्र राजेंद्र प्रेमीने आदेश वापस लेनेपर विरोध प्रकट किया । उन्होंने कहा, “मेरे पिताजीने बहुत पुरूषार्थ किया था, उन्हें उर्दूमें अनुवाद करनेमें लगभग ५० वर्ष लग गए थे ! १९९० में मेरे पिताजी हुतात्मा हो गए थे । वह एक स्वतन्त्रता सेनानी, कवि और साहित्यकार थे । उन्होंने बहुत सी पुस्तकें लिखी है । पूरा जीवन कश्मीरियत, मानवता, और मानव सेवामें लगा दिया । उनके मरणोपरान्त पुस्तकको प्रकाशित किया गया । इसके लिए मुझे और मेरे परिवारको काफी मेहनत करनी पडी ।”
उन्होंने पूछा, “किस आधारपर २४ घण्टे के भीतर ही रामायण और भगवद्गीता पुस्तकपर प्रतिबन्ध लगा दिया गया ! राज्यके महाविद्यालय, विद्यालय और पब्लिक पुस्तकालयके लिए ये दोनों पुस्तकको रखने के लिए एक अधिसूचना (नोटिस) दी गई थी । उस पर अब तत्काल रोक लगा दी गई है ! मैं चाहता हूं कि इस प्रकरणपर सरकारको एक बार पुनः सोचना चाहिए कि क्यों प्रतिबन्ध लगाया है ? फारूक अब्दुल्लाने दिल्लीमें पुस्तकका विमोचन किया था । उनके पुत्र उमर अब्दुल्लाने कहा था कि प्रेमी साहबके मारे जानेसे एक मानवताको मार दिया गया । ये बातें फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्लाने कही थी । निराशाकी बात है कि उन्हीं उमर अब्दुल्लाने पुस्तकके बारेमें ट्वीट किया है कि इससे सम्पूर्ण कश्मीरियतकी आत्माको ठेस पहुंची है !”
“कश्मीरी पण्डितोंको मारकर बनाए जिहादी धर्मान्धोंके आसुरी राज्यमें भला ‘गीता’को कौन संरक्षण देगा ? क्या धर्मनिरपेक्षवादी मीडिया व बुद्धिजीवी इसपर कुछ कहेंगें ? आतंकका पर्याय बने कश्मीरमें, अब राम राज्यकी स्थापनाके पश्चात् ही वहांका शुद्धिकरण कर, धर्मशिक्षण दिया जाएगा !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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