जम्मू-कश्मीरके ‘अलगाव’वादी संगठन हुर्रियत अधिवेशनके सभी गुटोंको ‘UAPA’ के अन्तर्गत प्रतिबन्धित करेगा शासन, आतङ्की वित्तपोषणपर (फंडिंगपर) होगा नियन्त्रण


२६ नवम्बर, २०२१
      जम्मू-कश्मीरमें शान्ति व्यवस्थामें अडचन डालने और कट्टरता फैलानेमें, ‘अलगाव’वादी संगठन हुर्रियत अधिवेशनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है । इसके कई नेताओंपर आतङ्कियोंको धन उपलब्ध करानेका आरोप है । इसको देखते हुए केन्द्रके मोदी शासनने शीघ्र ही कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत अधिवेशनके सभी गुटोंको ‘गैर-कानूनी’ गतिविधि रोकथाम अधिनियमकी (यूएपीएकी) धारा-३(१) के अन्तर्गत प्रतिबन्धित कर सकता है ।
      एक अधिकारीने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अधिकारीको बताया कि ‘यूएपीए’के अन्तर्गत प्रतिबन्ध लगानेसे आतङ्की वित्तपोषणके साथ ही हुर्रियतद्वारा जिन मार्गोंसे यह किया जाता है, उसे भी रोका जा सकेगा । उल्लेखनीय है कि हुर्रियत पाकिस्तानके महाविद्यालयमें अपने ‘कोटे’से ‘मेडिकल सीटों’का विक्रय करता है और उससे मिलनेवाले धनको कश्मीरमें आतङ्कवादको बढावा देनेके लिए प्रयोग करता है ।
      प्रतिबन्ध लगानेके पश्चात हुर्रियतको अपने सभी कार्यालयों और प्रारम्भिक ढांचेको ध्वस्त करना होगा । इसके अतिरिक्त, उसकेद्वारा बुलाए जानेवाले बन्द और विरोध अवैध हो जाएंगे । शासन हुर्रियतके विरुद्ध प्रतिबन्ध लगानेका निर्णय करनेके पश्चात आधिकारिक राजपत्रमें इसकी घोषणा करेगा ।
       केन्द्र शासनद्वारा यदि ऐसा पग उठाया जा रहा है तो यह निर्णय सराहनीय है । हुर्रियत ही वह जड है, जिसके कारण आतङ्कवाद और ‘पाकिस्तानी’ षड्यन्त्र भारतके मस्तकपर ‘पनप’ रहे है । ऐसे ही कठोर निर्णय अभी और भी लिए जाने शेष हैं, जिसकी प्रतीक्षामें सभी देशवासी, केन्द्र शासनकी ओर अपेक्षाके साथ देख रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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