इस बार चुनावमें मतदान पहलेकी तुलनामें कम हुई है, इतना प्रचार-प्रसार करनेके पश्चात भी यदि यह स्थिति है तो इससे यह समझ सकते हैं कि देशकी जनतामें लोकतन्त्रके प्रति उत्साह न्यून हुआ है, उन्हें ज्ञात है कि चाहे कोई भी आए, स्थिति वैसी ही रहनेवाली है ! प्रजाके इस उत्साहहीनताको दूर करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अति आवश्यक है !
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