नवम्बर १९, २०१८
‘साहित्य आजतक २०१८’में अन्तिम दिवस गीतकार जावेद अख्तरने कहा, “मैं अधर्मी आदमी हूं । मैं तो अयोध्या क्या, विश्वमें कहीं कोई धार्मिक स्थान न हो तो मैं बहुत प्रसन्न हो जाऊं । मुझे धार्मिक स्थानोंमें कोई रूचि ही नहीं, चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो या गिरिजाघर हो ! जावेद अख्तरने कहा कि मुझपर प्रहार चारों ओरसे नहीं, दो ओरसे होता है, शेष दो मेरी ओर हैं ।”
नगरोंके नाम परिवर्तनके प्रश्नपर जावेद अख्तरने कहा, “अब किसी प्रकार तो नगरोंको ‘स्मार्ट’ बनाया जाए, नाम ही परिवर्तन करो । महत्वपूर्ण बात यह है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है कि इस देशमें कमसे कम १००-१५० नूतन नगर बनने चाहिए ।”
“सूरदास, मीराबाई, जनाबाई, तानसेन, रायदास आदि महाकवियोंने सनातन धर्मके बलपर अपने गायनसे समूचे विश्वको अपने समक्ष झुकाया । वस्तुतः कला स्वयं ही प्रेम व धर्मको जागृत करते हैं, परन्तु कुछ पैसोंके लिए आजके नट-नटीके लिए गाने वाले तथाकथित गीतकार क्या धर्मका मोल जान पाएंगे ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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