सामान्यत: भारतके लोकसभा या विधान सभा चुनावोंमें ५५ से ६५ % मतदान होता है ! प्रत्याशियोंकी संख्या कितनी होती है ?, यह तो सभीको ज्ञात ही है ! जो प्रत्याशी जीतता है, उसे भी उस क्षेत्रकी जनसंख्याका ३० % मत नहीं मिलता है ! इस ३० % मतदाताओंमें कितने निरपेक्ष भावसे मात्र देशका विचारकर मतदान करते हैं या कितने प्रतिशत बुद्धिजीवी होते होंगे जिन्हें राजनीति एवं उचित और अनुचितका बोध होगा ?, यह भी आप सबको ज्ञात है ! हमें यदि परीक्षामें ३० % अंक आये तो हम फिसड्डी कहलाते हैं ! अब आगे तो आप सब समझदार ही हैं, लोकतन्त्रके जीते हुए प्रत्याशी क्या सचमें बहुमत लेकर लोकतन्त्रके मंदिरमें बैठनेकी पात्रता रखते हैं ?, क्या वे सचमें इस लोकतान्त्रिक प्रक्रियामें उत्तीर्ण कहलाते हुए शासन करनेके खरे अधिकारी हैं ?, यह आप स्वयं सोचें ! इसलिए इस अलोकतांत्रिक लोकतन्तका अन्त होना चाहिए !
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