सामान्य विवादको लेकर धर्मान्धोंके जनसमूहद्वारा रामेश्वरकी लोहेके ‘रॉड’से पीट-पीटकर हत्या


१८ मार्च, २०२२
     महाराष्ट्रके जालनाके अंबड गांवमें १५ जिहादियोंने एक हिन्दू युवककी लोहेकी ‘रॉड’ और क्रिकेट बल्लेसे पीट-पीटकर हत्या कर दी । १२ मार्चकी सन्ध्याको अंबडके पठान टोलेमें घटना घटित होनेके पश्चात सभी आरोपित भाग खडे हुए । अगले दिवस चिकित्सालयमें उपचारके समय पीडितकी मृत्यु हो गई ।
     मृतकका नाम रामेश्वर अंकुश खरात है । उनकी उम्र कहीं १४ वर्ष बताई जा रही है तो कहीं २० वर्ष । यद्यपि, यह बात स्पष्ट रूपसे बताई जा रही है कि रामेश्वर हिन्दू धार्मिक गतिविधियोंसे जुडे सेवाकार्योंमें बढ-चढकर भाग लेते थे । इसके चलते वह जिहादी सोच रखनेवाले जिहादियोंकी दृष्टिमें चढे हुए थे । एक छोटीसी घटनाको विवादका विषय बनाकर उनकी हत्या कर दी गई ।
     ‘पुलिस’ने इस प्रकरणमें ९ आरोपितोंको बन्दी बनाया है; जबकि ६ अभीतक ‘पुलिस’की अभिरक्षासे बाहर हैं । हत्यामें सम्मिलित आरोपितोंके नाम – इब्राहिम सिराज शेख, अदनान सुलानी, शफीक सुलानी, शोहैब सुलानी, अजहर एजाज अली शेख, फैजान अहमद पठान, अरबाज शाह मोहम्मद पठान, मुरादी मेहरा शेख, आवेज सिराज शेख, शोहैल शाह, मोहम्मद पठान, अनिस गफ्फार शेख, वाजिद इस्माइल शेख, अमीर चांद पठान, अरशद खुर्शीद जिलानी बताए जा रहे हैं ।
       हिन्दुओ, ‘दया धर्मका मूल है पाप मूल अभिमान । तुलसी दया न छोडिये जबतक घटमें प्राण ॥’; रामचरितमानसकी यह चौपाई त्रेता युगमें पूर्णतया सत्य थी; किन्तु अधर्मी हिन्दुओं, वामपन्थी समाचार संस्थानों एवं धर्मनिरपेक्ष लोगोंद्वारा पोषित धर्मान्ध कभी इस भावनाका सम्मान नहीं करेंगे; इसलिए अपने अस्तित्वको बचानेके लिए भगवान श्रीकृष्णके मूलमन्त्रको अपनाते हुए, स्वरक्षा एवं धर्मरक्षाके लिए सभी युक्तियोंको अपनाना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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