‘पुनः बनाओ बाबरी’, ‘जेएनयू’में वामपन्थी छात्रोंने ‘मस्जिद’के समर्थनमें निकाली जनयात्र, ‘न्यायकी लडाई’के नामपर किए अत्यधिक आपत्तिजनक उद्घोष
०६ दिसम्बर, २०२१
एक बार पुनः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) चर्चामें है । इस बार वहांपर बाबरी ढांचेके समर्थनमें प्रदर्शन किया गया है । सोमवारको (६ दिसम्बरको) यह आयोजन ‘जेएनयू’ छात्रसंघकी ओरसे हुआ था । सार्वजनिक हो रहे दृश्यपटमें इसे न्यायकी लडाई बताया जा रहा है ।
इस दृश्यपटमें ‘जेएनयूएसयू’ उपाध्यक्ष साकेत मूनको कथित रूपसे कहते सुना जा सकता है, “उन्हें दण्डके साथ-साथ क्षतिपूर्ति भी देनी पडेगी । आपको ये कहना पडेगा कि जो बाबरी ढांचा गिराया गया, वह अनुचित गिराया गया; इसीलिए न्याय होगा कि बाबरी पुनः बनाई जाए । इस न्यायके लिए लडाई है ।”
‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार बाबरीके समर्थनमें यह जनसमूह गंगा ढाबापर लगा था । समय रात्रिके लगभग ८ बजकर ३० मिनिटका था । यह सभी वामपन्थी विचारधाराके छात्र बताए जा रहे हैं; जिन्होंने कालान्तरमें जनयात्राके रूपमें चंद्रभागा छात्रावासपर (हॉस्टलपर) एक सभाके रूपमें सम्बोधन दिया । इस मध्य “नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं सहेंगे दादरी, पुनः बनाओ, पुनः बनाओ बाबरी” जैसे उद्घोष लगनेके समाचार है ।
‘जेएनयू’में छात्रोंको न्यूनतम शुल्कपर (नि:शुक्ल कहना अधिक उचित होगा) शिक्षाका अधिकार प्राप्त है, उसके पश्चात भी ये छात्र अध्ययन न कर, राजनीति कर रहे हैं । ऐसेमें ‘जेएनयू’ प्रबन्धनने, देशविरोधी उद्घोष लगानेवाले छात्रोंको दिए गए शिक्षा सम्बन्धित सभी विशेष अधिकार, तत्काल प्रभावसे निरस्त करने चाहिए और इन्हें दण्डित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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