भगवान राम व मांं सीताको अपशब्द कहनेवालोंके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं, गांधी राष्ट्रपुत्र हो सकते हैं राष्ट्रपिता नहीं, कालीचरण महाराजपर बोले जूना अखाडेके महामण्डलेश्वर


३१ दिसम्बर, २०२१
     मोहनदास करमचंद गांधीपर एक वक्तव्यके पश्चात छत्तीसगढ ‘पुलिस’द्वारा कालीचरण महाराजको ‘कानून’को ताकपर रखकर बन्दी बनाए जानेके पश्चातसे इस प्रकरणमें चर्चा बढ गई है । इसी क्रममें जूना अखाडेके महामण्डलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरिने वक्तव्य देते हुए प्रश्न किया है कि यदि शासन वास्तवमें इतना संवेदनशील है तो भगवान राम और सीता माताका उपहास उडानेवालों और उन्हें व्यभिचारी कहनेवालोंके विरुद्ध भी कार्रवाई करे । कालीचरण महाराजने महात्मा गांंधीपर जो भी टिप्पणी की है, सन्त समाज उसका समर्थन नहीं करता है । गांंधीजीका सम्मान है; किन्तु इस देशमें भगवान रामको आए दिवस अपशब्द कहे जाते हैं और मांं सीताको व्यभिचारिणी कहा जाता है । ‘टीवी’ धारावाहिकों और चलचित्रोंमें उनका उपहास उडाया जाता है, देवी-देवताओंके नग्न चित्र बनाए जाते हैं । उस समय कोई कुछ क्यों नहीं बोलता ? तब कोई कार्रवाही क्यों नहीं की जाती ? उन्होंने ये वक्तव्य हरिद्वारमें दिया ।
         स्वामी गिरिके अनुसार, गांधीजीने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलनमें अहिंसाको सबसे ऊपर रखा, उनका योगदान सम्मानीय है । सन्तने इस बातकी ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि गांंधीजीके अफ्रीकासे लौट आनेसे पूर्व भी असंख्य क्रान्तिकारी थे और उन्हें भी स्मरण करनेकी आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्तिको संग्रामका श्रेय नहीं दिया जा सकता । उस संग्राममें सुभाष चंद्र बोष, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, गंगाधर तिलक समेत कई लोग हैं । सन्तने द्वारिका पीठके शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीकी बातको दोहराया और कहा कि आदर और सम्मान अपने स्थानपर है; किन्तु राष्ट्रसे बडा कोई नहीं हो सकता । यदि राष्ट्रसे बडा कोई है तो वह परमात्मा है । गांधी राष्ट्रपिता नहीं, राष्ट्रके पुत्र हो सकते हैं ।
      महामण्डलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरिजीका वक्तव्य बोधजन्य व अनुसरणीय हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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