जहां विराजमान थे राम-जानकी, उनके मन्दिरके स्थानपर खोल लिया ‘बिरयानी रेस्टोरेंट’, ‘पाकिस्तानी’ आबिदसे मुख्तारने क्रय किया था यह स्थान 


२१ मई, २०२२
              उत्तरप्रदेशके कानपुरमें शासकीय कागदोंमें जिस स्थानपर श्रीराम-जानकी मन्दिर बताया गया है, वहां वास्तवमें ‘बिरयानी रेस्टोरेंट’ चल रहा है । शत्रु सम्पत्ति देखनेके समय यह ज्ञात हुआ है ।
        कानपुरके बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहापर  भवन सङ्ख्या ९९/४ अ ‘राम-जानकी मन्दिर ट्रस्ट’के नाम है । वर्ष ८० के दशकतक यहां पूजा हुआ करती थी । अब मन्दिरका कुछ ही जीर्ण-शीर्ण भाग शेष है । मुख्य भागमें ‘बिरयानी’ विक्रय व अन्य भागमें रसोई है ।
          मुख्तारके बेटे महमूद उमरने बताया कि उसके पिता मुख्तारने यह सम्पत्ति वर्ष १९८२ में आबिद रहमानसे क्रय की थी, जो स्वयं १९६२ में पाकिस्तान चला गया था । वहां हिन्दुओंकी १८ आपणियां थीं, जो एक-एक करके गिरा दी गईं । इशहाक बाबा इस मन्दिर परिसरका ध्यान रखता था । उसके पश्चात उसका बेटा मुख्तार यहां ‘साइकिल’का कार्य करता था ।
         शत्रु सम्पत्ति संरक्षक कार्यालयकी ओरसे इन्हें सूचना देते हुए सम्पत्ति सम्बन्धी प्रश्न किए गए हैं । अधिनियमके अन्तर्गत जो लोग १९४७, १९६५ या १९७१ में पाकिस्तान चले गए, उनकी सम्पत्ति ‘शत्रु सम्पत्ति’ घोषितकर उसे शासनने राजसातकर ली है । भारतके नागरिकोंको विरासतमें ऐसी सम्पत्ति मिले, जो किसी पाकिस्तानके नागरिकके नाम थी तो २०१७ के संशोधन अनुसार उसपर भी भारत शासनका अधिकार होगा ।
     उपर्युक्त नियमानुसार उक्त भूमि व ‘राम-जानकी’ मन्दिर परिसरपर शासनका अधिकार होगा । आशा है कि उसे शीघ्र खाली करवाकर वहां श्रीराम व जानकी पुनः विराजमान हों, इसके प्रयास भारत शासनको करने चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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