१० वर्षका कारावास और सहस्रोंसे लेकर लाखोंका अर्थदण्ड (जुर्माना), कर्नाटकमें प्रस्तुत होगा धर्मान्तरण विरोधी विधेयक (बिल), जानें, प्रारूपके विशेष बिन्दु


२० दिसम्बर, २०२१
   उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और हिमाचल प्रदेशके पश्चात अब कर्नाटक शासन भी धर्मान्तरणके विरुद्ध कठोर होने जा रहा है । कर्नाटक शासन विधानसभामें धर्मान्तरण विरोधी ‘बिल’ प्रस्तुत करनेवाला है । इसका प्रारूप पूर्ण हो चुका है और इसके अन्तर्गत कर्नाटकमें धर्मान्तरण करानेपर ३ से लेकर १० वर्षतक के दण्डका प्रावधान है । साथ ही धर्मान्तरणके आरोपित व्यक्तिपर एक लाख रुपएतक का अर्थदण्ड भी लगाया जा सकेगा । इसके साथ ही न्यायालयके आदेशके पश्चात, दोषी व्यक्तिद्वारा, पीडितको ५ लाख रुपएतक का क्षतिपूर्ति राशि भी देना पड सकती है । यद्यपि, विधानसभामें प्रस्तुत होनेके उपरान्त इसपर चर्चा होगी और इसमें कुछ परिवर्तन भी हो सकते हैं ।
   नए विपत्रके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छासे धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसकी प्रक्रिया भी थोडी बढाई गई है । सर्वप्रथम धर्म परिवर्तन करनेवाले व्यक्तिको धर्म परिवर्तनसे ६० दिवस पूर्व जनपदाधिकारीको सूचित करना होगा । इसके पश्चात जनपदाधिकारी इसका अवलोकन कराएंगे और अवलोकनके पश्चात सब कुछ ठीक होनेपर अपनी सहमति देंगे । इसके पश्चात व्यक्तिको धर्मान्तरणके उपरान्त ३० दिवसके भीतर घोषणापत्र भी देना होगा । प्रस्तावित विधानमें कहा गया है कि यदि कोई भी संस्था अथवा संगठन यदि उल्लङ्घन करता है, उसे भी दण्ड दिया जाएगा । इसमें कहा गया है कि अवैध धर्मान्तरणके एकमात्र उद्देश्यके लिए किए गए विवाहके प्रकरणमें, विवाहको पारिवारिक न्यायालयद्वारा अमान्य घोषित कर दिया जाएगा । यदि कोई पारिवारिक न्यायालय नहीं हैं, तो ऐसे प्रकरणोंकी सुनवाई करनेका अधिकार क्षेत्रवाला न्यायालय भी ऐसे विवाहोंको अमान्य घोषित कर सकता है ।
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       दक्षिण भारतमें कट्टरपन्थी मुसलमान संगठन एवं अशासकीय संगठनोंके (NGO के) रूपमें ईसाई समुदायके लोग हिन्दुओंका धर्मान्तरण करने हेतु यथासम्भव प्रयास कर रहे हैं । इस मध्यमें कर्नाटक शासनका यह निर्णय सराहनीय है । अन्य राज्योंके शासन भी धर्मान्तरण विरोधी विपत्र लाकर समाजमें धर्मान्तरण करनेवाले लोगोंपर अङ्कुश लगानेका कार्य शीघ्र करें, जिससे हिन्दुओंको अन्य पन्थोंमें जानेसे रोका जा सके । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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