कर्नाटकमें विद्यालयका विवाद विश्वविद्यालयतक पहुंचा, ‘हिजाब’में पहुंची २० मुसलमान छात्राएं, प्राचार्यने कहा, “निर्धारित गणवेशमें (यूनिफार्ममें) आओ !”
४ फरवरी, २०२२
कर्नाटकके उडुपीके विद्यालयसे आरम्भ हुआ ‘हिजाब’ विवाद समूचे कर्नाटकमें प्रचारित हो गया है । ३ फरवरी २०२२ को (गुरुवारको) प्रातःकाल कर्नाटकके उडुपी जनपदके कुंडापुरके भण्डारकर विश्वविद्यालयमें ‘हिजाब’ परिधान किए २० से अधिक छात्राओंको विश्वविद्यालयमें प्रवेश करनेसे रोक दिया गया । विश्वविद्यालयके प्राचार्यने छात्राओंसे कहा कि शासनके आदेश और विश्वविद्यालयके दिशा-निर्देशोंके अनुसार उन्हें कक्षाओंमें समरूप परिवेशमें आना होगा । इसपर छात्राओंका तर्क था कि वे लम्बे समयसे ‘हिजाब’में आ रही हैं और उन्हें इसकी अनुमति दी जानी चाहिए । राज्यके शिक्षामन्त्री बीसी नागेशने विश्वविद्यालयके अधिकारियोंसे स्पष्ट रूपसे कह दिया है कि छात्राएं केवल समरूप परिवेशमें आ सकती हैं ।
इससे पूर्व जनवरीमें चिक्कमंगलुरुके एक विश्वविद्यालयमें ‘हिजाब’ परिधानकर आनेवाली छात्राओंके विरुद्ध विरोध करते हुए विश्वविद्यालयके छात्र भगवा रंगका गमछा पहनकर विश्वविद्यालय पहुंचे थे । इसे लेकर कई छात्रोंने धरना भी दिया था । ‘हिजाब’ विरुद्ध भगवा गमछा बन चुका यह विरोध अबतक हुबली, उडुपी, कुंडापुरके विद्यालय और विश्वविद्यालयमें सामने आ चुका है ।
कर्नाटकके इन विश्वविद्यालयोंने ‘हिजाब’ पहनकर आनेवाली मुसलमान छात्राओंको रोककर उचित निर्णय ही लिया है । वर्तमानमें मुसलमान ‘हिजाब’में आनेका कह रहे हैं । कल ‘बुर्के’का अनुरोध करेंगे; तत्पश्चात ‘नमाज’ और ‘मस्जिद’पर अडेंगे । यही इनका इतिहास रहा है । राष्ट्रके सभी विद्यालय और विश्वविद्यालय भी ‘हिजाब’में आनेवाली छात्राओंपर अब रोक लगाएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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