आजके समाजकी दुर्दशाका मूल कारण है – सभीको अपने अधिकार ज्ञात हैं, कर्तव्य नहीं ! कर्तव्यनिष्ठ समाज ही सुखी होता है, अपने कर्तव्यपालनकी मूल भावनाको त्यागकर, मात्र अधिकारोंकी मांग करनेवाले स्वार्थी जीवने आज समाजमें अराजकता निर्माण कर दी है ! और मनुष्यको कर्तव्य पालनका बोध, धर्म और साधनाका अनुसरण करनेसे ही होता है अन्यथा आजकी तथाकथित निधर्मी पद्धतिसे शिक्षित समाज कर्तव्यनिष्ठ होता !
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