“जो राष्ट्रको विभाजित कर दे, वह मेरी दृष्टिमें देशद्रोही”, गांधीपर तरुण मुरारी बापूके वक्तव्यपर नरसिंहपुरमें कांग्रेसने प्रविष्ट कराया प्रकरण
०५ जनवरी, २०२२
मोहनदास करमचंद गांधीको लेकर कालीचरण महाराजके वक्तव्यके पश्चात अब एक और कथावाचक तरुण मुरारी बापूने वक्तव्य दिया है । उन्होंने कहा, “जो राष्ट्रका विभाजन कर दे, वह राष्ट्रपिता कैसे हो सकता है ?” तरुण मुरारीने गांधीका विरोध करते हुए कहा, “मेरी दृष्टिमें महात्मा गांधी राष्ट्रद्रोही हैं । वह न तो महात्मा है और न ही राष्ट्रपिता हो सकते है । जीवित रहते हुए राष्ट्रका विभाजन करनेवालेको राष्ट्रद्रोही कहा जाना चाहिए । महात्मा गांधीने कहा था कि विभाजन मेरे शवपर होगा; परन्तु यह उनके नेत्रोंके समक्ष हुआ था । आप हों, मैं अथवा बापू, जो भी राष्ट्रका विभाजन करता है, वह मेरे विचारमें ‘राष्ट्रद्रोही’ है ।”
विवरणीके अनुसार, युवा कांग्रेसके नेता रोहित पटेलके परिवादपर तरुण मुरारी बापूके विरुद्ध ४ जनवरी २०२२ को (मंगलवारको) नरसिंहपुर ‘पुलिस’ने प्रकरण प्रविष्ट किया था । तरुण मुरारीने ३ जनवरी २०२२ को (सोमवारको) छिंदवाडा मार्ग स्थित ‘वीरा लॉन’में श्रीमद्भागवद कथाके समय गांधीको लेकर ऐसा वक्तव्य दिया । इसपर ‘पुलिस’ने धारा ५०५ (२) और १५३ ‘बी’के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया ।
कांग्रेसके नेताओंको गांधीका अपमान तो दिखाई देता है; परन्तु क्या कभी इस दलके किसी नेताने, हिन्दू देवी-देवताओं अथवा सन्तोंका अपमान करनेवालोंके विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट कराया है ? नहीं; अपितु कांग्रेस ससदैव हिन्दुओंका अपमान करती आई है । कथावाचकका वक्तव्य एक सत्यकी ओर ही इंगित करता है; क्योंकि गांधी, अधिकृत रूपसे भारतके ‘राष्ट्रपिता’ नहीं हैं । भगवान राम इस देशके प्राण हैं, वे भी स्वयंको इस मातृभूमिका पुत्र ही कहते थे, जब रामजी भी ‘राष्ट्रपिता’ नहीं हो सकते हैं, तो कोई सामान्य मनुष्य इस देशका ‘राष्ट्रपिता’ कैसे हो सकता है ? इस तथ्यपर सभीको विचार करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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