दुष्कर्मकर अल्पवयस्कको गर्भवती करनेवाले ‘पादरी’का दण्ड उच्च न्यायालयने किया आधा, केरलकी पीडिताने दिया था बच्चेको जन्म


०२ दिसम्बर, २०२१
           केरल उच्च न्यायालयने १ दिसम्बर २०२१, बुधवारको कोट्टियूर दुष्कर्मके प्रकरणमें एक ‘पादरी’का दण्ड न्यून कर दिया है । २०१६ में एक अल्पवयस्क लडकीके साथ दुष्कर्म करनेके आरोपमें ‘पादरी’को दण्डित किया गया था । गर्भवती होनेपर दोषी पाए गए ‘सेंट सेबेस्टियन’ चर्चके पूर्व ‘पादरी’ ‘फादर रॉबिन वडक्कमचेरिल’को प्राप्त दण्ड आधा कर दिया गया ।                                                                            ‘पॉक्सो एक्ट’के अन्तर्गत अपराधोंके परीक्षणके पश्चात विशेष न्यायाधीश थालास्सेरीने ‘आईपीसी’की धारा-३७६ (एफ) और ‘पॉक्सो’ अधिनियमके प्रावधानोंके अन्तर्गत दोषी पाए गए पादरी ‘फादर रॉबिन वडक्कमचेरिल’को २० वर्षके कठोर कारावासका और तीन लाख रुपएका आर्थिक दण्ड दिया गया था । पीडिताद्वारा आरोपी पादरीसे विवाह करनेकी इच्छा व्यक्त करनेपर, सर्वोच्च न्यायालयने २० वर्षके दण्डको न्यून करते हुए, १० वर्ष कर दिया । पादरी ‘रॉबिन वडक्कमचेरिल’ने भी एक याचिका प्रविष्ट कराकर पीडितासे विवाह करनेके लिए, दण्डपर रोक लगानेकी मांग की थी ।
       ईसाई अथवा मुसलमान कोई दुष्कर्म करे तो उनका दण्ड त्वरित न्यून कर दिया जाता है; किन्तु हिन्दू साधु-सन्तोंको जीवन पर्यन्त कारागृहमें रखकर प्रताडित किया जाता है, जिससे दूषित न्यायालयोंका हिन्दू-द्वेष स्पष्ट दिखाई देता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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