धनके लिए मानव अंग तस्करी करनेवाले व दुष्कर्मके आरोपमें जिहादी शमशाद सहित अन्य तीन बनाए गए बन्दी
१८ अक्टूबर, २०२१
केरलके वायनाड जनपदसे एक चकित करनेवाला प्रकरण उजागर हुआ है । मनोरमाके प्रतिवेदनके अनुसार, गत सप्ताह ‘पुलिस’ने ३ युवकोंको निजी चिकित्सालयके समीप एक ‘फ्लैट’में महिलासे दुष्कर्म करनेके आरोपमें सुल्तान बाथेरीसे बन्दी बनाया है । इनका अभिज्ञान (पहचान) शमशाद, फसल महमूद एवं रहमानके रूपमें हुआ है; परन्तु ‘पुलिस’को जांचके मध्य ज्ञात हुआ कि जिस प्रकरणकी जांच वह दुष्कर्मको मानकर कर रही थी, वह तो कुछ और ही निकला । ‘पुलिस’को सन्देह हुआ कि इन आरोपियोंका सम्बन्ध मानव अंगोंके व्यापार करनेवाले समूहसे है एवं षड्यन्त्रके अन्तर्गत ही उन्होंने महिलासे धन कमानेके लिए एक योजना बनाई थी । ‘पुलिस’के अनुसार, जिहादी शमशाद १ माह पूर्व महिलाको बहला-फुसलाकर उसकी ‘किडनी’ विक्रयके लिए वायनाड जनपदके निजी चिकित्सालयमें ले गया था । उसने महिलाको ३ लाख रुपएमें ‘किडनी’ विक्रयके लिए मनानेका प्रयास किया था; परन्तु जब महिला न मानी, तो आरोपीने उसे ५ लाखका प्रलोभन दिया । वहीं, चिकित्सकोंद्वारा महिलाके ‘डायबिटिक’ होनेकी पुष्टि करनेपर शमशाद आगबबूला हो गया; इसके पश्चात उसने महिलाकेद्वारा धन कमानेकी युक्ति बनाई व ‘ऑनलाइन फंडरेजिंग कैंपेन’ चलाया । २६ सितम्बरको शमशाद उसे भी कोच्चि ले गया, जहां महिलाको मादक पदार्थ पिला, उसे अचेत कर दिया एवं तीनोंने महिलाके साथ कथित दुष्कर्म किया । आरोपीने महिलासे १८००० रुपए भी लिए जो उसने स्वर्णकी अंगूठी विक्रयके पश्चात प्राप्त किए थे । महिलाके ‘डेबिट कार्ड’से भी ३०००० रुपए निकाल लिए गए, जो उसे अन्योंसे मिले थे । ‘पुलिस’को चिकित्सालय व विश्रामालयसे प्रकरणसे सम्बन्धित साक्ष्य प्राप्त हो गए हैं । ‘पुलिस’ने बताया कि आरोपी ‘स्नेहदानम्’ नामक धर्मार्थ संगठनका पदाधिकारी है, जिसकेद्वारा मानव अंगोंकी सहजतासे तस्करी की जाती है ।
सनातन धर्म प्रत्येक मनुष्यमें जहां ईश्वरको देखने हेतु प्रेरित करता है, तो वहीं प्रत्येक जिहादीमें दानव ही दृष्टिगत होता है । यही तथ्य हिन्दू धर्मको अन्य पन्थोंसे पृथक करता है एवं ऐसे कृत्य करनेसे हमें रोकता है । अब सभीको साधनाके कठोर प्रयास कर अपने आध्यात्मिक बलको बढानेकी परम आवश्यकता है, जिससे इन असुरोंसे हमें ईश्वरीय रक्षण प्राप्त हो । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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