किशन बोलिया हत्या प्रकरण, २ सन्दिग्ध बन्दी, हिन्दू संगठनोंने किया बन्दका आह्वान, ‘फेसबुक’ लेखसे क्रोधित थे कट्टरपन्थी, सभीके समक्ष मारी थी गोली


२८ जनवरी, २०२२
      गुजरातके अहमदाबादमें २५ जनवरी २०२२ मंगलवारको हुए किशन बोलिया नामके युवककी हत्या प्रकरणमें ‘पुलिस’ने २ सन्दिग्धोंको बन्दी बनाया है । इसकी जानकारी गुजरातके गृहमन्त्री हर्ष सांघवीने दी है । उन्होंने किशनके परिवारको शीघ्र ही न्याय दिलानेका आश्वासन दिया है । ये बन्दी २७ जनवरी गुरुवारको की गई । बताया जाता है कि किशनने सामाजिक जालस्थलपर एक ‘वीडियो पोस्ट’ डाली थी । इसके पश्चातसे मुसलमानी कट्टरपन्थी उसके विरुद्ध थे । इस प्रकरणमें ५ पर अभियोग प्रविष्ट हुआ है । शेषकी खोज की जा रही है ।
      गृहमन्त्रीने यह भी कहा कि ‘पुलिस’ इस प्रकरणके विवरणके लिए निरन्तर कार्य कर रही है । वहीं दूसरी ओर इस घटनाके विरोधमें हिन्दू संगठनोंने धंधुका बन्दका आह्वान किया है । धंधुका अनुमण्डल अर्थात तहसील क्षेत्रमें हुए इस हत्याकाण्डकी प्रतिक्रिया अन्य नगरोंमें भी देखनेको मिल रही है । बोटाद जनपदके रणपुरमें भी बन्दका आह्वानकर प्रदर्शन किया गया है । विश्व हिन्दू परिषद्के इस आह्वानको स्थानीय लोगों और अन्य हिन्दू संगठनोंका पूरा समर्थन भी मिल रहा है । पण्यशाला स्वामियोंने अपनी पण्यशाला बन्द रखीं । जनपद अधिकारीके कार्यालयमें इस प्रकरणकी तीव्र गतिसे जांच करनेका ज्ञापन भी दिया गया ।
      अहमदाबाद ग्रामीणके ‘पुलिस’ अधीक्षक वीरेंद्र सिंह यादवने कहा, “पुलिसकी कई दल आरोपितोंको पकडनेके लिए कार्य कर रहीं हैं । अबतक २ आरोपितोंको पकडा जा चुका है । दोनोंसे पूछताछ चल रही है । इस प्रकरणमें सभी आवश्यक विधानके अनुसार कार्यवाही की जा रही है ।
      विदित हो किशनके लेखपर कई व्यक्तियोंने आपत्ति व्यक्त की थी । ‘पुलिस’ने भी किशनके विरुद्ध कार्यवाही की थी । इसके पश्चातसे किशनने अपनी ‘प्रोफाइल’में ‘सेटिंग’को व्यक्तिगत कर दिया था । साथ ही घरसे बाहर निकलना बन्द कर दिया था । घटनाके दिन किशन अपने दोपहियासे निकला था । प्रत्यक्षदर्शीके अनुसार मोढवाडा मोडपर किशनपर पहली गोली चलाई गई, जिसमें वह बच गया । इसके पश्चात उसपर दोबारा आक्रमण किया गया । इसके परिणाम स्वरूप किशनकी मृत्यु घटनास्थलपर ही हो गई थी । बताया गया कि आरोपित किशनका पीछा कर रहे थे । ‘पुलिस’ने शंका व्यक्त की थी कि सम्भवत: विवादित लेखके कारण ही किशनकी हत्या हुई हो ।
       देशमें अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता एक विशेष वर्गको ही है और सहिष्णुताकी अपेक्षा भी एक विशेषवर्गसे की जाती है । जिहादियोंके ऐसे कृत्य किसी भी प्रकारकी समाचार वाहिनियोंके मुख्य समाचार नहीं बनते ? हिन्दुओं अन्यायके विरुद्ध वैध प्रकारसे लडें भी और अपराधियोंको उचित दण्ड मिले उसके लिए शासन एवं प्रशासनके समक्ष स्वर भी उठाएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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