जनवरी १४, २०१९
मकर संक्रांतिके पावन पर्वपर हैदराबादमें पतंगबाजीपर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है । बता दें कि प्रत्येक वर्ष १४-१५ जनवरीको मकर संक्रांतिके अवसरपर लोग पतंग उडाते हैं; परन्तु इस वर्ष हैदराबादके पुलिस आयुक्तने यह कहते हुए प्रतिबन्ध लगा दिया है कि इससे अराजकता फैलेगी !
‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’के अनुसार, पुलिस आयुक्त अंजनी कुमारने अपने आदेशमें लोगोंसे कहा कि वे पतंग न उडाएं और न ही अपने बच्चोंको उडाने दें । उन्होंने कहा, “व्यवस्था और शांति बनाए रखनेके लिए यह पग उठाया गया है । प्रत्येक वर्ष मकर संक्रान्तिके अवसरपर १४ और १५ जनवरीको पतंगबाजी होती है । बच्चे कटे पतंगोंको पकडनेके लिए सडकोंपर आ जाते हैं, जिससे शांति व्यवस्था बनाए रखनेमें समस्या होती है; इसलिए यह पग उठाया गया है ।” अब पुलिस आयुक्तके ऐसे आदेशके पश्चात प्रश्न उठना स्वाभाविक है ।
“मान लेते हैं कि बच्चे सडकपर पतंग पकडने आते हैं, जिससे वाहन चालकोंको कठिनाइयोंका सामना करना पडता है, जो कि नहीं होना चाहिए; परन्तु इसके लिए पतंगबाजीपर ही प्रतिबंध ? क्या पतंगबाजीसे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं ? क्या पतंगबाजी धार्मिक असहिष्णुताका प्रतीक है ? पतंगबाजी भारत वर्षकी सैकडों वर्षों प्राचीन परम्परा है । ये उत्सव यहां धूमधामसे नहीं मनेगा, तो क्या पाकिस्तान, सऊदी अरब अफगानिस्तान, आदि देशोंमें मनेगा ? क्या पुलिसने कभी बकरीदपर होनेवाले संहार व लोगोंकी कठिनाईपर विचार किया है ? पुलिस आयुक्तका यह आदेश सनातन संस्कृतिकी आस्थाओं और परम्पराओंपर आघात है, इससे ही निधर्मी शासकोंकी हिन्दू द्रोहिताका बोध होता है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : इपोस्टमोर्टेम
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