‘१० वर्ष छोटी बौद्ध लडकीको भगा ले गया अब्दुल कादिर’, कारगिलमें ‘लव-जिहाद’पर बौद्ध संघने कहा, “इससे अनियन्त्रित होगी परिस्थिति”
४ दिसम्बर, २०२१
केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाखमें कारगिलके जंस्कर क्षेत्रमें अन्तरधार्मिक विवाह एक बडे विवादमें परिवर्तित हो गया है । मुसलमान युवक और बौद्ध महिलाके ‘निकाह’को बौद्ध समुदाय बलात धर्मान्तरणकर ‘निकाह’ करनेकी घटना बता रही है और इसे ‘लव-जिहाद’की संज्ञा दी है । वहीं, दम्पत्तिने इन आरोपोंको नकारते करते हुए, न्यायालय जानेका निश्चय किया है ।
पदम जंस्करके रहनेवाले ३१ वर्षीय अब्दुल कादिर वानी और २१ वर्षीय बौद्ध महिलासे मुसलमान बनी सुमाया कौसरने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा और सहमतिसे विवाह किया है । उन्होंने आगे बताया, “मैंने बिना किसी दबावके अब्दुल कादिरके साथ अपनी इच्छासे ‘निकाह’ किया है । मेरे माता-पिता और अन्य सम्बन्धियोंको कादिर प्रिय नहीं लगते है; इसलिए वे मेरे विवाहित जीवनमें हस्तक्षेप कर रहे हैं । मुझे उनसे भय है । मैं अपने पतिके साथ रहना चाहती हूं ।”
बता दें कि ‘निकाह’के चार दिन बाद लद्दाख बौद्ध संघने (एलबीएने) लद्दाखके उप-राज्यपालको (एलजीको) पत्र लिखकर, बलात धर्मान्तरण प्रकरणमें त्वरित हस्तक्षेप और कार्रवाईकी मांग की थी । संघने लिखा कि कादिर बौद्ध लडकीके साथ उसका धर्मान्तरण करानेके लिए भागा है । संघने चेतावनी दी है कि यदि शासनने कठोर पग नहीं उठाया तो क्षेत्रमें साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगड सकता है ।
इस प्रकारसे अपने धर्मको छोड अन्य धर्मको अपनाना यह स्पष्ट करता है कि लद्दाख जैसे क्षेत्रमें भी युवाओंका अब पतन हो रहा है और वहांके बौद्ध भी अब यह सब रोकनेमें असमर्थ प्रतीत हो रहे है । यदि उन्होंने लद्दाखके युवाओंको उचित प्रकारसे धर्म शिक्षण दिया होता, तो कदाचित ऐसे प्रकरण न होते ! किन्तु जब लडकी स्वयं अपनी इच्छासे विवाह कर चुकी है, तो अब न्यायालय भी उनको संरक्षण देगा ही, यह अत्यन्त निन्दाका विषय है कि भारतके युवा अपने ही परिवार और समाजके विरुद्ध हो रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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