जून ३०, २०१८
उत्तरप्रदेशकी राजधानी लखनऊमें अब भगवान रामके अनुज लक्ष्मणकी प्रतिमा स्थापित करनेको लेकर विवाद आरम्भ हो गया है । राजधानीमें नगर निगमकी कार्यकारिणीने एक बैठकके समय लखनऊके प्रसिद्ध ‘टीले वाली मस्जिद’के सामने लाल पुलके निकट लक्ष्मण जीकी मानव ऊंचाईके विग्रह लगानेसे सम्बन्धित एक प्रस्तावपर विचार विमर्शके बाद इसे स्वीकृति दे दी गई । मस्जिदके सामने हिन्दुओंके भगवान लक्ष्मणके विग्रहके लगाए जानेकी सूचना मिलनेके बाद विवाद आरम्भ हो गया है । कई मुस्लिम धर्मगुरुओंने इसका विरोध किया है !
‘टीले वाली मस्जिद’के ‘मौलाना इमाम’ मौलाना शाह फजर्लुरहमानने कहा है कि ईद और दूसरे मुस्लिम त्योहारोंके समय लाखों मुस्लिम इस मस्जिदके बाहर ‘नमाज’ पढते हैं; लेकिन जब मस्जिदके बाहर विग्रहका निर्माण होगा, तब वो लोग वहां ‘नमाज’ नहीं पढ सकते हैं ! उन्होंने कहा कि एक ऐसा ही प्रस्ताव ख्रिस्ताब्द १९९३-९४ में बना था; लेकिन विपक्षके विरोधके चलते यह सम्भव नहीं हो सका । उन्होंने यह भी कहा कि वो इस प्रकरणको लेकर उच्च अधिकारियोंतक जाएंगे और उनसे विनती करेंगे कि वो अपने निर्णयको बदलें; क्योंकि यह शान्तिके लिए संकट हो सकता है !
इधर ‘न्यूज 18’से वार्ता करते हुए लखनऊके मेयर संयुक्ता भाटियाने कहा कि कार्यकारिणी समितिकी बैठकमें यह प्रस्ताव लाया गया कि लक्ष्मणजीका विग्रह नगर शमें स्थापित काया जाएगा; यद्यपि अभी यह पूर्ण रूपसे निर्णय नहीं हो पाया कि यह विग्रह कहां लगाया जाएगा ? उन्होंने कहा कि हमारा पूरा प्रयास होगा कि इस प्रकरणको लेकर कोई विवाद ना हो ! आपको बता दें कि लक्ष्मणका विग्रह लगानेसे पूर्व लखनऊ नगर निगमको पुरातत्विक विभागसे अनुमति लेना पडेगी ।
आपको बता दें कि कुछ दिवस पूर्व बीजेपी नेता लालजी टण्डनने अपनी पुस्तक ‘अनकहा लखनऊ’के बारेमें वर्णन करते हुए कहा था कि उनकी पुस्तकमें चर्चित ‘टीले वाली मस्जिद’को लेकर लिखा गया है कि वहां पहले ‘लक्ष्मणका टीला’ अस्तित्वमें था ! इस पुस्तकको लेकर भी उस समय काफी विवाद हुआ था ।
स्रोत : जनसत्ता
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