जब सीता माताके आभूषणका अभिज्ञान करनेका निर्देश भगवान श्रीरामने लक्ष्मणजीको दिया तो लक्ष्मणजीने अपनी जितेन्द्रियन्ताका परिचय देते हुए कहा कि मैं मात्र उनके नूपुरका अभिज्ञान ही कर सकता हूं; क्योंकि मेरी दृष्टि मात्र उनके चरणोंपर रहती थी । ऐसी है हमारी दैवी संस्कृति, जिसे पाश्चात्यों और धर्मान्धोंने सांस्कृतिक आक्रमणकर, इस देशसे नष्टप्राय कर दिया है । आइए ! इसे पुनर्जीवित करनेका संकल्प लें !
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