‘हिन्दुओंमें भेद उत्पन्न करनेके लिए षड्यन्त्र,’ ‘द लल्लनटॉप’को महन्तने लताडा, चलाया था शिवलिंगको ‘फव्वारा’ बतानेवाला दुष्प्रचार अभियान
२८ मई, २०२२
‘द लल्लनटॉप’ नामक समाचार माध्यमने समाचार चलाया है कि काशी करवटके महंत गणेश शंकर उपाध्यायने कहा है कि ज्ञानवापी विवादित ढांंचेमें जो मिला, वह शिवलिंग नहीं; अपितु ‘फव्वारा’ है । मुसलमान पक्षके मिथ्या प्रपञ्चको चलानेवाले ‘लल्लनटॉप’को अब महन्तने अत्यधिक ‘खरी-खोटी’ सुनाई है और उनके वक्तव्यको ‘तोड-मरोड’कर प्रस्तुत करनेपर लताड लगाई है ।
महन्त गणेश शंकर उपाध्यायने स्पष्ट कहा कि क्या लोग नेत्रहीन हैं कि उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है ? उन्होंने कहा कि समूचे ज्ञानवापीमें हिन्दू मन्दिर होनेके प्रमाण उपस्थित हैं, कैसे उसे ‘मस्जिद’ मान लें ? उन्होंने कहा कि ज्ञानवापीके ऊपर-नीचे, ‘अगल-बगल’, चारों ओर प्रमाण पडे हुए हैं । उन्होंने आरोप लगाया कि ‘लल्लनटॉप’ने उन्हें भ्रमितकर कुछ कहवा लिया और घूमा-फिराकर सिद्ध करनेमें लगे हुए हैं कि वह ‘फव्वारा’ है ।
महन्तने कहा, “किस शताब्दीकी बात कर रहे हैं ? हम सनातनियोंसे सहस्राब्दियोंकी बात कीजिए, जिनका लाखों वर्षोंका इतिहास है । पुराण हैं, ग्रन्थ हैं हमारे ! कौन उसे तिरस्कृत करता है ? दुष्प्रचारित करनेवाले कलङ्क हैं, हिन्दू समाजके नामपर । ५ बार आप ‘रिकॉर्डिंग’ करते हैं और दिखाएंंगे ५ मिनटका । कहांंका किसका आपने किसमें जोड दिया और कहांंसे क्या ले लिया ? समूचे षड्यन्त्रके अन्तर्गत मेरे वक्तव्यको इस प्रकारसे प्रस्तुत किया गया, जिससे हिन्दुओंमें विभेद हो, वे एकजुट न रहें !”
उन्होंने ऐसा करनेवालोंको विधर्मी घोषित करते हुए कहा कि ऐसे लोगोंका अभिज्ञान करनेकी आवश्यकता है, जो एक ‘लॉबी’ षड्यन्त्रके रूपमें कार्य कर रही है । उन्होंने कहा कि ये ‘मीडिया’से लेकर राजनीति तकमें सक्रिय हैं । मुसलमान पक्षके ‘बाबरी’ देनेवाले वक्तव्यपर महन्तने कहा कि हमने लडकरक बाबरी ढांचा लिया है, सहस्रों लोगोंने प्राण न्योछावर किए हैं । उन्होंने औरंगजेबकी क्रूरता और उसके भाईकी हत्याका उल्लेख करते हुए कहा कि उससे अधिक वीभत्स इतिहास किसी मुगल शासकका नहीं रहा ।
‘द लल्लनटॉप’के निकृष्ट पत्रकारिताके लिए उसके संचालक सहित उत्तरदायी निकृष्ट पत्रकारोंपर व्यापक अर्थदण्ड और कारावास देनेकी दिशामें त्वरित सूचना और प्रसारण मंत्रालयको कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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