लौकी (हिन्दी – घीया, दूधी, संस्कृत – कुम्माण्डः, अंग्रेजी – Bottle Gourd, Pumpkin) मात्र एक शाक ही नहीं, वरन कई रोगोंको दूर भगानेवाली औषधि है । लौकीमें लगभग ९६% मात्रा जलकी होती है और इसमें रेशे (फाइबर) भी प्रचुर मात्रामें पाए जाते हैं । इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि ये अत्यधिक सरलतापूर्वक मिल जाती है । यह बेलपर उत्पन्न होती है और कुछ ही समयमें बहुत बडी हो जाती है । इसका उपयोग सहस्रों रोगियोंपर सलादके रूपमें अथवा रस निकालकर या शाकके रुपमें लम्बे समयसे किया जाता रहा है । यह गोल, लम्बी, बोतलके और छोटी किसी भी आकारकी हो सकती है । लम्बी तथा गोल दोनों प्रकारकी लौकी वीर्यवर्धक, पित्त तथा कफनाशक और धातुको पुष्ट करनेवाली होती है । यह एक अल्प मूल्यका शाक है, जिसे घरपर भी सरलतासे उगाया जा सकता है । लौकी ग्रीष्म ऋतुका शाक है और तेज धूप निकलनेपर ही बढता है ।
घटक – लौकीके पौष्टिक गुण प्रति १०० ग्राम – लौकीमें जल ९६.१ %, ‘कार्बोहाइड्रेट’ २.५%, ‘प्रोटीन’ ०.२%, वसा ०.१%, रेशा ०.६%, ‘सोडियम’ १.८, ‘मैग्नीशियम’ ५.०, ‘पोटैशियम’ ८७.०, ‘कैल्शियम’ २०.२, तांबा ०.३, लोहा ०.७, ‘फॉस्फोरस’ १०, गंधक १०, ‘विटामिन बी-१’ ०.०३, ‘विटामिन बी-५’ ०.२ ‘विटामिन-सी’ ६.० प्रति १०० ग्राममें मि.ग्रा.की मात्रामें पाए जाते हैं ।
सेवन विधि – लौकीका निम्न प्रकारसे सेवन किया जा सकता है –
१. लौकीका शाक (सब्जी) बनाकर खाया जा सकता है, इसमें अधिक मसालोंका प्रयोग न करें ।
२. लौकीका रस (जूस) आयुर्वेदमें अत्यधिक प्रसिद्ध है । औषधीय गुणोंके लिए अधिकांश लोग इसके रसका प्रयोग करते हैं; परन्तु इसका उपयोग सावधानीपूर्वक ही करना चाहिए, लौकी कडवी नहीं होनी चाहिए ।
३. लौकीका हलवा बनाकर खाया जा सकता है ।
४. लौकीको कच्चा भी खाया जाता है ।
लौकीका रस (जूस) कैसे बनाएं – इसे बनानेके लिए सर्वप्रथम लौकीको अच्छेसे धोकर छील लें । इसके पश्चात कद्दूकससे इसे कस लें । इसके साथ ही कुछ पत्ते तुलसी और पुदीनाके डालकर इसे सिलबट्टेपर पीस लें । पिसी हुई लौकीको सूती वस्त्रमें डालकर रस निकाल लें, इसमें कालीमिर्च और सेंधा नमक मिला सकते हैं । जितना रस निकले, उतना ही इसमें जल मिला लें ।
ध्यान देने योग्य यह है कि लौकीके रसका सेवन सदैव ताजा ही करना चाहिए । लौकीका रस निकालते समय थोडासा चख लेना चाहिए; क्योंकि यदि रस कडवा लगे तो उसे कदापि न पिएं और पुनः बना लें । लौकीका रस भोजन करनेसे पूर्व या भोजनके एक घंटे पश्चात पिएं । इसे दिनमें दोसे तीन बार ले सकते हैं । कल हम लौकी व इसके रससे होनेवाले लाभोंके विषयमें बताएंगें ।
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