‘भाग – २६.३’में हमने लौकीके कुछ लाभोंके विषयमें जाना था । आज हम लौकीसे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें –
* अतिसारमें (दस्तमें) – लौकीका रायता अतिसार होनेपर लाभप्रद होता है । लौकीको कद्दूकससे कसकर थोडा जल डालकर उबाल लें, तदोपरान्त दहीको अच्छेसे फेटकर उसमें उबली हुई लौकीको हल्कासा निचोडकर मिला दें । इसके पश्चात इसमें सेंधा नमक, भूना जीरा, कालीमिर्चका चूर्ण मिलाकर सेवन करें ।
* पाचन सम्बन्धी रोगोंमें – आजके समयमें कोष्ठबद्धता (कब्ज) और पाचन सम्बन्धी रोग एक सामान्य समस्या बन चुके हैं, जो किसी भी मानवको हो सकते हैं । प्रतिदिन प्रातःकाल लौकीका रस पीनेका अभ्यास करें । इसमें विद्यमान ‘फाइबर’ पाचन तन्त्रको ठीक करते हैं । इसमें विद्युत-अपघट्य (इलेक्ट्रोलाइट्स) भी होते हैं, जो शरीरमें इसके सन्तुलनको बनाकर रखते हैं, जिससे अतिसारकी समस्या नहीं होती है । लौकीके रसका नियमित रूपसे और उचित मात्रामें सेवन करना जठरके (पेटके) लिए अत्यधिक लाभप्रद माना जाता है । यह पाचन तन्त्रको स्वस्थ रखनेमें सहायता करता है । लौकीके रसका यह लाभ मुख्य रूपसे लौकीमें विद्यमान ‘फाइबर’के कारण होता है । ‘फाइबर’ एक प्राकृतिक रेचकके रूपमें कार्य करता है । यह ‘बॉवेल मूवमेंट’में (आंतोकी गति) सुधारकर शरीरसे मल निकलनेमें सहायक है । यह कोष्ठबद्धतासे लाभ प्रदानकर हमारे समग्र पाचन स्वास्थ्यमें भी सुधार करता है । इसके साथ ही लौकीका रस अन्य पाचन समस्याओं जैसे उदर वेदना, आंतोकी गतिमें अवरोध (बॉवेल मूवमेंट), वायुविकार, पेट फूलना, सूजन आदिमें लाभ प्रदान करनेके लिए भी प्रभावी है । इसके अतिरिक्त लौकीमें लगभग ९२ प्रतिशत जल होता है । जल हमारे पाचन स्वास्थ्यको बनाए रखनेमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; क्योंकि यह चयापचयमें सुधारकर पाचनमें सहायता करता है और हमारे आन्त्र आन्दोलनको भी सरल बनाता है ।
* बालोंके लिए – यदि आप बालोंके झडने और शीघ्र श्वेत (सफेद) होनेकी समस्यासे उद्विग्न हैं तो आप लौकीके रसका सेवन करके देखें, आपको अवश्य लाभ मिलेगा । लौकीके रसमें तिलका तेल मिलाकर बालोंकी जडोंमें अच्छी प्रकारसे लगानेसे बालोंका झडना और गंजापन एकदम दूर हो जाता है । आयुर्वेद अनुसार बालोंको श्वेत वर्णके होनेसे बचानेके लिए यह अत्यधिक लाभकारी उपाय है । रूसीके कारण आपके सिरकी त्वचा मृत परतोंसे भर जाती है । आंवला और लौकीके रसको समान मात्रामें मिलाकर पीनेसे रूसी अल्प होती है, साथ ही इस मिश्रणसे सिरपर मालिश करनेसे भी रूसी ठीक होती है । इसमें ‘विटामिन-बी’ होता है, जिससे आपके सिरकी त्वचापर ठंडा प्रभाव पडता है और यह बालोंके प्राकृतिक रंगको बनाए रखता है । लौकीके रसका नियमित रूपसे सेवन करनेसे बालोंके झडने जैसी समस्याओंको अल्प किया जा सकता है ।
* मानसिक तनावको दूर करे – आजके समयमें बच्चोंसे लेकर बुजुर्गतक प्रत्येक व्यक्ति तनावसे ग्रस्त है । यदि आप स्वास्थ्यके लिए लाभप्रद आहार नहीं लेते तो स्थिति और भी विकट हो सकती है । लौकीमें जलकी मात्रा अधिक होनेके कारण शरीर शीतल रहता है, जिससे तनावमें लाभ मिलता है । इसके मूत्रल (मूत्रवर्धक, ड्यूरेटिक), वेदना हरनेके गुण (सेडेटिव) और पित्तदोषनिवारक (एंटी-बिलियस) गुण शरीरको स्वस्थ अनुभव करने और तनाव मुक्त रखनेमें सहायता करते हैं ।
लौकीके रसमें तन्त्रिका संचारक कोलीन (एक जलमें घुलनशील पोषकतत्त्व, जो यकृत कार्य, मस्तिष्क विकास, तन्त्रिका कार्यमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है) (न्यूरोट्रांस्मिटर कोलीन) अधिक मात्रामें पाए जाते हैं, जो मस्तिष्कको सुचारु रूपसे कार्य करनेमें सहयता कर, तनाव जैसी समस्याओंको न्यून करनेमें लाभकारी होता है । लौकीका रस मस्तिष्ककी कोशिकाओंको अच्छेसे कार्य करनेमें सहायता करता है, जिससे मस्तिष्कपर दबाव नहीं पडता और अवसाद जैसी स्थितिमें सहायता मिलती है ।
* मूत्र संक्रमण करें दूर – शरीरमें सोडियमकी अधिकता होनेसे मूत्र संक्रमणकी (यूरिन इन्फेक्शन) समस्या बढ जाती है, जिससे मूत्र त्याग करते समय जलन होने लगती है । लौकीका रस इसमें अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध होता है ।
अगले भागमें (२६.५) हम लौकी व इसके रससे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें ।
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