लोहगढमें (पुणेमें) अवैधरूपसे ‘दरगाह’पर चढाई गई ‘चादर’
२४ जनवरी, २०२२
पुणेके लोहगढमें एक संरक्षित स्मारक होनेके कारण वहां धार्मिक कार्यक्रमोंके आयोजनपर प्रतिबन्ध है; परन्तु आजके समयमें महाराष्ट्रके कई दुर्गोंपर हो रहे मुसलमान आक्रमणकारियोंके अतिक्रमणोंको देखते हुए जाग्रत हिन्दुत्वनिष्ठ दुर्गपर हो रहे अवैध निर्माणकार्यके विषयमें ‘पुलिस’ प्रशासन और पुरातत्त्व विभागसे वैधानिक पद्धतिसे परिवादकर मुसलमानी आक्रमणको रोकनेका प्रयास कर रहे हैं । लोहगढपर भी ‘दरगाह’का अवैध निर्माणकार्य हो रहा है, साथ ही दुर्गपर अवैधरूपसे ‘उर्स’का आयोजन किया जा रहा है; ऐसा हिन्दुत्वनिष्ठोंके ध्यानमें आया था । इस विषयमें भी हिन्दुत्वनिष्ठोंने ‘पुलिस’ प्रशासन और पुरातत्त्व विभागको सूचित किया था, तथापि हिन्दुत्वनिष्ठोंके बढते विरोधके कारण ‘पुलिस’ प्रशासनने उन्हींको सूचनापत्र भेजा । हिन्दुत्वनिष्ठोंके विरोधके कारण लोहगढपर उसका बडी मात्रामें आयोजन न करते हुए स्थानीय ‘पुलिस’कर्मियोंकी उपस्थितिमें १७ जनवरीको हाजी उमरशाहवली न्यासके ५ सदस्योंने यहांके अवैध ‘दरगाह’पर ‘चादर’ चढाई ।
इस कृत्यसे केन्द्रसे प्राप्त आदेशके अनुसार मुंबई पुरातत्त्व विभागद्वारा उर्स न मनानेके विषयमें दिए गए आदेशका ‘पुलिस’ प्रशासन और अवैधरूपसे ‘चादर’ चढानेमें सम्मिलित व्यक्तियोंसे एक प्रकारसे उल्लङ्घन ही हुआ है ।
वैधानिक पद्धतिसे परिवाद करनेवाले हिन्दुत्वनिष्ठोंको सूचनापत्र अर्थात ‘नोटिस’ देकर और हाजी उमरशाहवली न्यासके सदस्योंके साथ स्थानीय ‘पुलिसकर्मियों’की उपस्थिति सन्देह उत्पन्न करती है । हिन्दुत्वनिष्ठोंके विरोध करनेके उपरान्त हिन्दुओंने भी वहां पूजाकी, ऐसा दिखाकर ‘पुलिस’ प्रशासन हिन्दुत्वनिष्ठोंकी स्वरको दबा रही है । ऐसी ‘पुलिस’ कैसे विधि-व्यवस्था रख पाएगी ? यह भी चिन्ताका ही विषय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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